
SPECIAL NEWS: अरावली की वादियों में है खट्टे-मीठे फलों का भंडार
सीकर/टोडा. अरावली की वादियों में खनिज संपदा, आयुर्वेदिक औषधियां, विभिन्न प्रकार की घास, वनस्पति सहित पहाड़ी फलों का भंडार है। पहाड़ी फल स्वाद में खट्टे-मीठे होने के साथ ही काफी लजीज होते है। जंगल से भोजन एकत्र करने वाली जनजाति के लोग पहाड़ी फलों को तोड़कर बाजार में बेचकर अपना जीवन यापन करते है। इनकी झाड़ियां किसानों के खेतों के लिए काफी फायदेमंद होती हैं। यह पारिस्थितिकी संतुलन बनाने के साथ-साथ मृदा अपरदन को रोकने में सहायक होती है। पशुपालक इनका उपयोग पशुओं को चारे के रूप में खिलाने में काम लेता है। खट्टे कच्चे पहाड़ी फलों की चटनी बनाकर भी खाते हैं जो खाने में स्वादिष्ट होती हैं। यह पहाड़ी फल पूरी तरह से जैविक है। यह पहाड़ी फल जुलाई से अक्टूबर तक लगते हैं। पशुपालक इनकी पत्तियों को बकरी व भेड़ को चारे के रूप में खिलाते हैं। वहीं किसान इनकी झाड़ियों को खेतों के चारे तरफ बाड़ बनाने में काम लेता है। भारत जैव विविधता पोर्टल से इन पहाड़ी फलों के सामान्य व वानस्पतिक नाम तथा महत्व की जानकारी जुटाई गई है।
वानस्पतिक नाम: ग्रेविया प्लेवेसेंस
इसे रफ लीव्ड किशमिश, सैंड पेपर किशमिश या ***** बेरी कहा जाता है। यह भारत का मूल पहाड़ी फल है। इसकी पत्तियां बकरी, भेड़ व अन्य पशुओं को खिलाने में काम लिया जाता है। इसके फल रेशेदार व कठोर होते हैं, जो पकने पर मीठे होते हैं। इसके फल हार्नबिल और बंदर अधिक खाते हैं। इसके तने कोणीय होते हैं। इसके पत्ते चौड़े होते हैं जो अनियमित पत्तेदार छतरी बनाते है। इसकी पत्ती दो से पांच मीटर तक होती है। इसके तारे जैसे पीले फूल आते हैं।
वानस्पतिक नाम: रस मायसोरेंसिस
यह पहाड़ी फल कच्चा होता है तब खट्टा होता है। खट्टे फलों से इसकी चटनी बनाई जाती है, जो काफी लजीज होती है। यह फल पकने पर खट्टा मीठा होता है। जंगलों से भोजन संग्रह करने वाली जनजाति इसके पके फलों को एकत्र करती है तथा बाजार में बेचकर अपना जीवन यापन करती है। इनकी पत्तियां बकरी व भेड़ को खिलाने में काम ली जाती है। इसका तना कांटेदार होता है। किसान इनका उपयोग खेतों में बाड़ बनाने में काम लेता है। इसकी पत्तियां छोटी होती है तथा काफी मजबूत होता है। इसके तनों की टोकरियां, छाबड़ियां आदि बनाई जाती है।
वानस्पतिक नाम: ग्रेविया टेनैक्स
इसके फालसा चेरी तथा सफेद क्रॉसबेरी भी कहते हैं। यह पकने पर नारंगी या हलका पीला होता है, जो खाने में स्वादिष्ट होता है। कई जगह इसके सूखाकर खाते है तथा पेय के रूप में काम में लेते है। इसे फालसा का चचेरा भाई कहते है। इसकी छाल चिकनी, भूरी तथा रेशेदार होती है। इसकी टहनी मजबूत होती है, जिसे तोड़ना मुश्किल होता है। इसके फल एक से चार गोलाकार जोड़े के साथ आते है। इसके फलों में प्रचूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। इसकी पत्तियों को पशुओं को खिलाने में काम लिया जाता है। किसान टहनी को काटकर खेतों के चारों तरफ बाड़ बनाता है।
Published on:
29 Nov 2023 12:19 pm
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