
तीस साल बाद 16 कलाओं वाला चंद्रमा बरसाएगा अमृत
सीकर. शरद पूर्णिमा रविवार को मनाई जाएगी। घर और मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम होंगे। चांद की रोशनी में खीर रख भगवान को भोग लगाया जाएगा। वैदिक ज्योतिष के मुताबिक इस दिन चांद 16 कलाओं से पूर्ण होगा। इसकी धवल चांदनी अमृत की बरसात करेगी। मां लक्ष्मी भी जन्म दिवस पर पृथ्वी पर भ्रमण करने आएगी।
पं. दिनेश मिश्रा ने बताया कि सालभर की सर्वश्रेष्ठ पूर्णिमा पर इस बार दुर्लभ महालक्ष्मी योग बन रहा है। जो चंद्रमा और मंगल के आपस में दृष्टि संबंध होने की वजह से बनेगा। 30 साल बाद बन रहे विशेष योग में चंद्र प्रकाश खीर खाने से जहां स्वास्थ्य लाभ होगा, तो वहीं पूजा- अर्चना से महालक्ष्मी की भी विशेष कृपा होगी।
महालक्ष्मी और गजकेसरी योग साथ
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा इस बार मीन राशि और मंगल ग्रह कन्या राशि में रहेगा। इस तरह दोनों ग्रह एक दूसरे के सामने होंगे। मंगल चंद्रमा के स्वामित्व वाले हस्त नक्षत्र में रहेगा। इससे पहले यह संयोग 30 साल पहले बना था। चंद्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि होने से महालक्ष्मी योग के साथ गजकेसरी योग भी बन रहा है।
यह है मान्यता
शरद पूर्णिमा का संबंध स्वास्थ्य से माना गया है। मान्यता है कि पूर्ण कलाओं से युक्त चांद की किरणें औषधीय गुणों वाली होती है। ऐसे में चांद की रोशनी में दूध की खीर बनाकर रखने से वह कई गुना गुणकारी हो जाती है। जिसका प्रसाद ग्रहण करने से इंसान निरोगी होता है।
शहर में होंगे आयोजन
शरद पूर्णिमा पर शहर में कई धार्मिक आयोजन होंगे। श्री सोमोलाई बालाजी सेवा समिति की ओर से शेखपुरा मोहल्ले से बालाजी धाम के लिए निशान पदयात्रा निकाली जाएगी। मंदिर में दोपहर 12 बजे जन्म आरती के बाद प्रसाद वितरण व शाम को भजन संध्या होगी। इससे पहले शनिवार को बद्री विहार में सुंदरकांड पाठ होगा। चिरंजी पनवाड़ी गली स्थित श्याम मंदिर में बाबा श्याम के विशेष श्रृंगार के साथ रात को उत्सव के बीच खीर का भोग लगाया जाएगा। फतेह बालाजी मंदिर में भी कई धार्मिक कार्यक्रमों के बीच केसरिया खीर का भोग लगाया जाएगा। दांतारामगढ़ के श्रीबालाजी धाम छितरवाल में हनुमान जयंती महोत्सव पर निशान पदयात्रा के साथ राममंत्र के जाप व प्रसाद वितरण का आयोजन होगा।
Published on:
12 Oct 2019 09:17 pm
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