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Rajasthan Development: शिक्षानगरी के लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने की दिशा में यूआइटी की कदमताल लगातार जारी है। नवलगढ़ रोड को फतेहपुर रोड से जोड़ने के लिए बनने वाले लगभग साढ़े छह किलोमीटर लंबे बाईपास के लिए यूआइटी ने लगभग 70 फीसदी जमीन अधिग्रहण का काम पूरा कर लिया है।
जमीन अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद निर्माण का जिम्मा सार्वजनिक निर्माण विभाग को मिलने की संभावना है। इस बीच भैरूपुरा व जगमालपुरा इलाके के ग्रामीणों की ओर से जमीन अधिग्रहण में भेदभाव के आरोप लगाए है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यूआइटी की जान बूझकर भेदभाव किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मौजूदा पत्थरगढ़ी मास्टर प्लान से हटकर की है। ग्रामीणों का आरो है कि रिंग रोड में बदलाव से सैकड़ों किसान प्रभावित हो रहे है। दूसरी तरफ यूआइटी ने ग्रामीणों के सभी आरोपों को गलत बताया है। इस मामले में ग्रामीणों की ओर से न्यायालय में भी याचिका दायर की थी।
नए मास्टर प्लान के पेंच उलझने के बाद शहरवासियों में मास्टर प्लान को लेकर कई तरह की भ्रम की स्थिति भी बनी हुई है।
यूआइटी सचिव जगदीश प्रसाद गौड़ ने बताया कि वर्ष 2013 में मास्टर प्लान 2031 का अनुमोदन हुआ था। इसके बाद 25 जून 2025 को मास्टर प्लान 2041 के प्रारूप का प्रकाशन हुआ। उन्होंने बताया कि फिलहाल नगरीय क्षेत्र में अनुमोदित मास्टर प्लान 2031 व प्रारूप मास्टर प्लान 2041 के तहत कार्यवाही की जा रही है।
मास्टर प्लान बनाने वाली कंपनी स्वायत्त शासन विभाग ने नगर परिषद के जरिए नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब आने के बाद स्वायत्त शासन विभाग की ओर से मास्टर प्लान को लेकर आगे के कदम उठाए जाएंगे। मास्टर प्लान को लेकर विवाद होने की वजह से प्रारूप प्रकाशन के बाद से काम अटका हुआ है।
मास्टर प्लान 2011 में 200 फीट की बाईपास प्रस्तावित थी। इसके अनुसार ही बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण का काम किया जा रहा है। ग्रामीणों की जो शिकायत मिली थी उनकी गंभीरता से जांच कराई जा रही है। तय प्लान में एक इंच का भी बदलाव नहीं किया गया है। यूआइटी ने 70 फीसदी अधिग्रहण का काम किसानों की सहमति से ही पूरा किया है।
जगदीश प्रसाद गौड़, सचिव, यूआइटी, सीकर
Updated on:
09 Jan 2026 11:47 am
Published on:
09 Jan 2026 11:46 am
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