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VIDEO सीकर : लोहार्गल परिक्रमा के श्रद्धालुओं पर बरपा कहर, तीन की मौत, 10 घायल

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सीकर

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Vishwanath Saini

•

Updated: 6 Sep 2018, 6:21 PM IST

Three devotees of lohargal parikrama died in Road accident sikar

Three devotees of lohargal parikrama died in Road accident sikar

सीकर.
शेखावाटी की अरावली की वादियों में बाबा मालकेत की परिक्रमा परवान पर है। इस बीच गुरुवार दोपहर को दर्दभरी खबर आई है। सीकर में परिक्रमा के श्रद्धालुओं से भरी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई है और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए हैं। घायलों को एम्बुलेंस 108 से सीकर के एसके अस्पताल में पहुंचाया गया है।

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जानकारी के अनुसार सीकर जिले के दादिया थाना इलाके में गुरुवार दोपहर लोहार्गल जा रहे श्रद्धालुओं के ऑटो रिक्शा को एक जीप ने टक्तर मार दी। हादसे में 2 महिलाओं समेत 3 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 10 लोग घायल हो गए हैं। लोहार्गल धाम में चल रही 24 किलोमीटर की परिक्रमा में शामिल होने के लिए 13 श्रद्धालु ऑटो रिक्शा में सवार होकर जा रहे थे। पांच घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।

झुंझुनूं : उदयपुरवाटी की 24 कोसीय परिक्रमा

तीर्थराज लोहार्गल में अब बाबा मालकेतु की 24कोसीय परिक्रमा की अच्छी-खासी रंगत दिखने लगी है। खाकी अखाड़े के महंत दिनेशदास महाराज के सान्निध्य में सैकड़ों साधु-संतों की टोली परिक्रमा का नेतृत्व कर रही है। यह परिक्रमा गोगानवमी से शुरू होकर अमावस्या के दिन संपन्न होती है।

इस बार यह 9 सितंबर को अमावस्या के दिन लोहार्गल के सूर्यकुण्ड में महास्नान तक चलेगी। बतादें कि लोहार्गल धाम को शेखावाटी के हरिद्वार के रूप में मान्यता प्राप्त है। 24कोसीय परिक्रमा के दौरान लाखों श्रद्धालु मालकेतु पर्वत के चारों ओर निकलने वाली सात धाराओं के दर्शन करते हैं।

इन धाराओं में लोहार्गल, किरोड़ी, शाकंभरी, नाग कुण्ड, टपकेश्वर महादेव, शोभावती और खोरी कुण्ड शामिल है। परिक्रमा की अगुवाई कर रही ठाकुर जी की पालकी का पहला रात्रि विश्राम किरोड़ी और दूसरा शाकंभरी में हुआ। अरावली पर्वतमाला की हरियाली पहाडिय़ों के बीच एक सप्ताह तक आस्था का ये कारवां यूं ही चलता रहेगा।

श्रद्धालुओं के जत्थे अरावली पर्वत श्रंृखला की दुर्गम पहाडिय़ों पर चढ़ते नजर आने लगे हैं। पहाड़ों पर हरियाली की चादर के बीच आस्था की ऐसी बयार का नजारा देखते ही बन रहा है। आज एकादशी पर श्रद्धालु चिराना और किरोड़ी की दुर्गम घाटी पार कर कोट बांध और शाकम्भरी से आगे भगोआ तक पहुंच गए हैं। जिससे विरान की तरह रहने वाली अरावली की पहाडिय़ां परिक्रमा के चलते भजन कीर्तन, लाखों श्रद्धालुओं की चहलकदमी औऱ धार्मिक जयकारों से गुंजायमान होती दिख रही है।