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इन बुजुर्गों ने मिलकर कायम की मिसाल, पार्क के फूल, पौधे भी देते हैं इन्हें लाख दुआएं

इस तरह की स्वच्छता का संदेश देने वालों में एक रेवेन्यू अफसर, एक डॉक्टर व तीसरे रोडवेज के मैकेनिक शामिल हैं।

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जोगेन्द्र सिंह गौड़
सीकर. शहर के पार्कों में फैली गंदगी की परवाह भले ही जिम्मेदार सरकारी नुमाइंदे नहीं कर रहे हैं। लेकिन, इन सबके बीच शहर में तीन शख्स ऐसे भी हैं। जो कि, सरकारी सेवा से तो सेवानिवृत हो चुके हैं। परंतु अब ये बुजुर्ग हाथों में झाडू थामे नियमित पार्कों में पहुंचते हैं और वहां बिखरी गंदगी और कचरे को अपने हाथों साफ कर स्वच्छता का पाठ बेपरवाह प्रशासन को सिखा रहे हैं।


खास बात यह है कि इस तरह की स्वच्छता का संदेश देने वालों में एक रेवेन्यू अफसर, एक डॉक्टर व तीसरे रोडवेज के मैकेनिक शामिल हैं। जी हां, उम्र के इस पड़ाव में स्वच्छता के प्रति इनकी इस दोस्ती का हर कोई कायल है। सुबह पांच बजे घर से निकल पडऩा और पार्कों में जाकर नियमित सफाई कर कचरा बीनना इनकी आदत में शुमार है। तीनों दोस्तों का मानना है कि जनचेतना फैलाने के लिए धीरे-धीरे एक दिन वे पूरी टीम तैयार कर देंगे।

हर दिन साइकिल से पहुंचते हैं पार्क
बजाज रोड़ पर रहने वाले डा. रामस्वरूप जाजू दो से तीन किलोमीटर का सफर साइकिल पर तय करके पार्कों में आते हैं। जहां भी गंदगी और कूड़ा-करकट बिखरा देखते हैं वहां अपने हाथों से झाडू लगाकर पार्क की सफाई करते हैं। इनका कहना है कि पहला सुख निरोगी काया होती है। ऐसे में गंदगी के बीच यदि कोई पार्क में टहलने आएगा तो संकमण व प्रदूषित वातावरण से उसके स्वास्थ्य पर भी विपरित असर पड़ सकता है।

लेकिन, यदि घूमने के लिए साफ-सुथरी जगह मिलेगी तो उसे भी दोहरा लाभ हासिल हो सकेगा। रोडवेज में मैकेनिक रहे सोहन सिंह भी जरिए साइकिल पार्क पहुंचते हैं। इन्होंने बताया कि सुबह जल्दी उठकर पहले घर की सफाई करता हूं। इसके बाद पार्क में आकर बिखरे पड़े कचरे को चुनकर डस्टबिन में डालता हूं और झाडू लगाकर पूरे पार्क की सफाई करता हूं। जरूरत के अनुसार लोगों के लिए बैठने वाली सीट पर भी पौछा मार देता हूं। इनका मानना है कि यदि हर आदमी अपने आस-पास सफाई रखने लग जाए तो शहर व पार्कों की सुंदरता को चार चांद लगाए जा सकते हैं।

कार में रखते हैं झाडू
वार्ड संख्या 24 के निवासी प्रदीप माथुर पहले नगर परिषद में ही रेवेन्यू अफसर थे। 63 वर्षीय माथुर सेवा निवृत होने के बाद पिछले दो साल से लगातार मारू पार्क आ रहे हैं। यहां नियमित सफाई करने के लिए अपने साथ कार में ही झाडू रखते हैं। इनका मानना है कि यदि उदेश्य सबके हित से जुड़ा हो तो कोई काम छोटा नहीं होता।

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