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आखिर वजह क्या रही की सिंगरौली कृषि विभाग ने वापस कर दिया एक करोड़ रुपए

कृषि विभाग ने वापस कर दिए एक करोड़ तेरह लाख, किसान सेवा यान के लिए स्वीकृत की गई थी राशि, तकनीकी कर्मचारियों की कमी बता संचालन कर पाने जताई असमर्थता

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one crore returning from the Department of Agriculture

one crore returning from the Department of Agriculture

सिंगरौली. अभी तक आप विभागीय अधिकारियों को बजट का रोना रोते हुए सुना होगा। अक्सर यही कहते फिरते हैं कि उन्हें बजट नहीं मिल रहा। लेकिन अब हम जो आपको बताने जा रहे हैं उसमें इसका उल्टा है। यहां विभाग ने बजट मिलने के बाद उसे वापस कर दिया।

यह पूरा मामला उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग सिंगरौली से संबंधित है। विभाग की इस हरकत से सभी हैरान हैं। आखिर वजह क्या रही की बजट वापस करना पड़ा। विभागीय अधिकारियों की सफाई है कि जिस कार्य के लिए बजट दिया गया था उस कार्य का संचालन करने के लिए उनके पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। जिसकी वजह से प्रोजेक्ट को रद्द करना पड़ा। लेकिन उनकी यह सफाई किसी के गले नहीं उतर रही है। चर्चा यहां तक है कि दबाव की वजह से विभागीय अधिकारी ने उस कार्य से हाथ खीचने में ही भलाई समझी। न रहेगा बांस,न बजेगी बांसूरी।

यह है पूरा मामला
कृषि विभाग ने कृषि सेवा यान की खरीदी के लिए कार्यपालिक समिति जिला खनिज प्रतिष्ठान के समझ प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद जिला खनिज प्रतिष्ठान मद (डीएमएफ) से किसान सेवा यान की खरीदी के लिए 97 लाख 50 हजार रुपए एवं प्रथम वर्ष की चालू लागत 15 लाख 78 हजार रुपए स्वीकृति किए गए। स्वीकृति राशि की 50 फीसदी राशि कृषि विभाग को जारी भी कर दी गई। कुछ समय गुजरने के बाद कृषि विभाग ने किसान सेवा यान खरीदी को लेकर हाथ खीच लिए। कृषि विभाग ने खरीदी से मना कर दिया। उन्होंने विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर पूरे प्रोजेक्ट को ही रद्द करने की मांग कर दी।

कृषि क्षेत्र को यह होता लाभ
कृषि सेवा यान जिले के किसानों के लिए किसी सौगात से कम नहीं था। उसकी मदद से जहां गांव - गांव में जाकर मिट्टी परीक्षण किया जा सकता था। वहीं किसानों को उन्नत कृषि करने की सलाह आसानी से दी जा सकती। प्रशिक्षित होकर किसान उन्नत कृषि करने के लिए उत्साहित होते। कम समय एवं लागत में ज्यादा से ज्यादा लाभ कमा सकते।

कृषि विभाग खाली हाथ
जिले के लोगों का मुख्य पेशा खेती ही है। उद्योग स्थापित होने से उन्हें ज्यादा लाभ नहीं मिला है। इसलिए वे अपने किसानी के धंधे में ही लगे हैं। ऐसे में उनकी उन्नति के लिए भी कुछ किया जाना जरूरी है। लेकिन अब कृषि सेवा यान का प्रोजेक्ट रद्द होने के बाद उनके लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान मद से कुछ नहीं मिला।

कार्यपालिका समिति ने दी थी मंजूरी
कलेक्ट्रेट में 19 दिसंबर 2016 को प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हुई कार्यपालिका समिति की बैठक में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रस्ताव पर कृषि सेवा यान खरीदी को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद कृषि विकास विभाग को स्वीकृति राशि का 50 फीसदी जारी भी कर दिया गया था। इतनी प्रक्रिया होने के बाद विभाग ने अचानक पूरे प्रोजेक्ट से हाथ खीच लिया।