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कोरोना काल में भी कृषि उपज मंडियों का कारोबार रहा बेअसर, मंडी शुल्क में मुनाफा ही मुनाफा

- रीवा संभाग की 11 कृषि उपज मंडियों में 33.33 फीसद का लाभ

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 krishi upaj mandi

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सिंगरौली. कोरोना ने सबको तबाह कर दिया। लोगो के कारोबार बंद हो गए। कामगारों का काम छिन गया वो बेकार हो गए। दाने-दाने को मोहताज हो गए लोग। लेकिन इसी दौरान कुछ व्यवसाय ऐसे भी रहे जहां बंदी तो दूर मुनाफा हुआ। वो भी तनिक मनिक नहीं बल्कि 33 फीसद से ज्यादा का मुनाफा।

हां, बात कृषि उपज मंडियों की हो रही है जहां व्यापार में औसतन वृद्धि हुई। रीवा संभाग की 11 कृषि उपज मंडियों में से ज्यादातर में मंडी शुल्क मद में वृद्धि दर्ज की गई। उप संचालक मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अनुसार रीवा संभाग की 11 कृषि उपज मंडियों में सितंबर माह में गत वर्ष की तुलना में 33.33 फीसद मंडी शुल्क में वृद्धि हुई। गत वर्ष सितंबर माह में मंडी शुल्क मद में एक करोड़ 38 लाख 17 हजार 106 रूपये की आय हुई थी। इससे उलट इस वर्ष सितंबर माह में एक करोड़ 84 लाख 22 हजार 179 रूपये की आय हुई है।

उप संचालक मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अनुसार गत वर्ष की तुलना में सर्वाधिक वृद्धि कृषि उपज मंडी चाकघाट में दर्ज की गई है। इसके अलावा कृषि उपज मंडी रीवा, बैकुंठपुर, नागौद में भी मंडी शुल्क से आय में वृद्धि हुई है।

उप संचालक ने बताया कि कोरोना महामारी का प्रकोप होने तथा लंबे समय तक लॉकडाउन रहने के बावजूद अप्रैल से सितंबब के बीच संभाग की कृषि उपज मंडियों 19 करोड़ 71 लाख 86 हजार 791 रूपये की मंडी शुल्क से आय हुई है। इस अवधि में कुल 91.9 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

सबसे ज्यादा 791.15 प्रतिशत वृद्धि सिंगरौली कृषि उपज मंडी में दर्ज की गई। इसके अलावा कृषि उपज मंडी रीवा में 61.69 प्रतिशत, बैकुंठपुर में 62.89 प्रतिशत, अमरपाटन में 330 प्रतिशत, नागौद में 37.36 प्रतिशत, सीधी में 122.63 प्रतिशत तथा चाकघाट में 562.96 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

कोरोना संकट तथा लॉकडाउन के बावजूद कृषि उपज मंडियों के कारोबार पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। इनमें हम्मालों तथा तौल करने वालों को लगातार रोजगार का अवसर भी मिला है।

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