
Singrauli Distric Hospital Trauma Center limitd to OPD and Gayani Ward
सिंगरौली. ऊर्जाधानी की जनता नए साल के स्वागत के लिए तैयार है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नए साल से बहुत सारी उम्मीदें थीं। मगर इस बार भी नए साल में उम्मीदों पर पानी फिर गया। जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में न तो डॉक्टर मिले और न ही सुविधाएं बढ़ी। दुर्भाग्य है कि जिला बने दस साल बीत गए लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। स्थिति यहां खराब हैं कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बुखार तक की दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वर्ष 2019 शुरू हुआ तो बहुत सारी उम्मीदें थीं।
मगर साल बीत जाने के बाद पीछे मुडक़र देखते हैं तो झोली खाली नजर आती है। सिर्फ नई बिल्डिंग में ओपीडी व गायनी वार्ड की शिफ्टिंग के अलावा मरीजों को कोई बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं हो सकी। इमरजेंसी सेवाओं का हाल देख लीजिए। यहां से हर पांचवें मरीज को नेहरू व एनटीपीसी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में न तो ब्लड की सुविधा है और न बड़ी जांच की। जिला को करीब 95 से ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत है। लेकिन मौजूदा हालात यह है कि 16 डॉक्टर हैं। जिले की 15 पीएचसी में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। कुछ ऐसा ही हाल सीएचसी का भी बना हुआ है।
वर्तमान में यह है स्थिति
जिला अस्पताल की स्थिति यह है कि यहां पर 40 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस समय 16 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। ओपीडी के चिकित्सकों से इमरजेंसी की सेवाएं ली जा रही हैं। जिससे ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ओपीडी डॉक्टरों की शाम व रात को ड्यूटी लगाई जा रही है। अब उम्मीद कर सकते हैं कि वर्ष 2020 में इन समस्याओं का समाधान हो।
प्राथमिक इलाज तक सीमित इमरजेंसी
हर साल मरीजों की उम्मीद जगती है कि इस साल स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी होगी। यहां तक कि इमरजेंसी में सुविधा मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। जिला लेवल पर ट्रामा सेंटर तो खुल गया है। पर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इमरजेंसी में सिर की चोट का कोई इलाज नहीं मिलता है। यहां तक कि इमरजेंसी में डॉक्टर तक नहीं पहुंचते हैं। यहां पर आने वाले हर चौथे व पांचवे इमरजेंसी केस को रेफर कर दिया जाता है।
बेहतर उपचार के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर
देश में ऊर्जाधानी के नाम से पहचान बना चुका सिंगरौली जिला स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में बिल्कुल पिछड़ा हुआ है। सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। यहां तक कि जिला मुख्यालय में कोई बेहतर प्राइवेट अस्पताल भी नहीं हैं। स्थिति यह है कि मरीजों को आज बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार
जिला अस्पताल में डायलिसियस सुविधा मुहैया कराई गई है मगर, ये सुविधा जिला अस्पताल में नाममात्र की है। सरकार जननी सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है, लेकिन हकीकत यह है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाऊंड की सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। लंबे समय बाद जिला अस्पताल में शुरू हुई अल्ट्रासाऊंड की सुविधा महिलाओं के लिए मुसीबत बन रहा है। उन्हें तीन दिन तक नंबर लगाना पड़ रहा है। एक्स-रे की बात करें तो सीएचसी व पीएचसी में ये सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पुरानी बिल्डिंग में ये सुविधाएं:
- टीबी की जांच
- एचआईवी की जांच
- महिला/पुरुष वार्ड
- एसएनसीयू
- बच्चा वार्ड
- एनआरसी
यह हैं हालात
- जिले में विशेषज्ञों के पद खाली
- ब्लड का समुचित इंतजाम नहीं
- बड़ी जांचों के लिए जाना पड़ता है प्राइवेट सेंटर
- इमरजेंसी में हर पांचवा मरीज हो रहा रेफर
- जिले की पीएचसी-सीएचसी पर एक भी डॉक्टर नहीं
- जिला अस्पताल में समय पर नहीं मिलते डॉक्टर
फैक्ट फाइल:
जिला अस्पताल - 01
पीएचसी - 15
सीएचसी - 07
Published on:
20 Dec 2019 12:49 pm

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