
नौनिहालों में शारीरिक व मानसिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध करवा रहा है। लेकिन यह सुविधा धरातल पर कितनी कारगर साबित हो रही है। खुद अधिकारी ही जानते है। अधिकारी जब केन्द्रों का निरीक्षण करते हैं तो स्थिति स्पष्ट होती है। लेकिन जिम्मेदारों की अनेदखी के कारण योजनाएं कारगर साबित नहीं हो रही है। जिला मुख्यालय पर कुल 16 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं, लेकिन इसमें से 15 केन्द्र किराये पर चल रहे हैं। एक केन्द्र सामुदायिक भवन में संचालित है। इन केन्द्रों पर शौचालय समेत अन्य सुविधा की बात करना तो बेमानी होगी। किराये पर केन्द्र संचालित होने के कारण इन केन्द्र का विकास भी नहीं हो रहा है। जिला मुख्यालय होने के बावजूद भी केन्द्रों के हालत बदहाल स्थिति में है। कार्यकर्ताओं ने बताया कि कुछ केन्द्र घर में संचालित होने के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
किराये के केवल पांच सौ किराया
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि केन्द्र किराये पर चलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग की ओर से केवल महीने के पांच सौ रुपए किराए देते है। साथ ही मकान मालिक के घर पर कोई कार्यक्रम होता हैं तो केन्द्रों को दूसरी जगह पर शिफ्ट करना पड़ता है। केन्द्र एक जगह से दूसरी जगह पर शिफ्ट करने दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किराये चलने के कारण केन्द्र में विकास कार्य भी नहीं होते। गर्मियों में तो हालत ओर भी गंभीर हो जाती है। शौच के लिए बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। पानी के लिए भी केन्द्र में मटका रखना पड़ता है।
आंगनवाड़ी केन्द्रों की यह है स्थिति
परेशानी हो रही है..
16 में से 15 केन्द्र किराये पर चल रहे है। केन्द्र किराये पर चलने के कारण परेशानी हो रही है। स्कूल प्रशासन से केन्द्र संचालित के लिए एक कमरा मांगते है लेकिन देने को तैयार ही नहीं है।
अल्का विश्नोई, महिला पर्यवेक्षक, आबूरोड शहर
Published on:
10 Dec 2016 09:51 am
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
