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यहां पानी का ‘टंटा’, अफसर सच्चे या जनता

जलदाय के अधीक्षण अभियंता का दावा: सिरोही शहर में रोजाना 23 टैंकरों से जलापूर्ति, इसके अलावा नलों से 72 घण्टे के अंतराल में दे रहे पानी   जनता बोली: कहां जा रहा पानी?, शहर में तो गिनती के टैंकर भी नहीं दिखते, नलों से भी यदि पर्याप्त पानी आता तो टांकों के ताले नहीं लगाते

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सिरोही में पानी की टंकियों पर लगाए ताले।

यहां पानी का 'टंटा', अफसर सच्चे या जनता

अमरसिंह राव/महेन्द्र वाघेला

सिरोही. गर्मी बढ़ते ही शहर समेत जिले के कई हिस्सों में पानी का संकट पैदा हो गया है। जल संकट के बीच जलदाय विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि सिरोही शहर में नलों से 72 घण्टे के अंतराल में पर्याप्त पानी दिया जा रहा है। साथ ही रोजाना 23 टैंकरों से भी शहर में जलापूर्ति की जा रही है। लेकिन शहर की जनता इन विभागीय अधिकारियों के दावे को झुठलाती है। जनता का कहना है कि शहर में तो गिनती के टैंकर भी नहीं दिखते फिर रोजाना 23 टैंकर पानी कहां जा रहा है?। नलों से लम्बे अंतराल से मिलने वाला पानी इतना कम आता है कि घर के बर्तन भी नहीं भर पाते। यदि पर्याप्त पानी आता होता तो घर के पानी के टांकों के ताले नहीं लगाने पड़ते। शहर में खासकर ब्रहमपुरी, कुम्हारवाड़ा, बोबावत लाइन, हरणलाइन, सुनारवाड़ा, झालरावास समेत कई मोहल्ले हैं जहां जलसंकट गहराया हुआ है। यहां के अधिकांश लोगों को पीने के पानी के लिए खुद के पैसों से टैंकर तक डलवाने पड़ रहे हैं।

सुभाषनगर के आधे इलाके में एक महीने से पानी नहींशहर के सुभाषनगर के आधे हिस्से में पिछले एक महीने से नलों में पानी की बूंद तक नहीं आई है। पत्रिका टीम ने जब सुभाषनगर का जायजा लिया तो वहां के नागरिकों ने बताया कि आखिरी बार एक महीने पहले 13 फरवरी को पानी आया था उसके बाद से आज तक नलों में पानी नहीं आया है। इसकी वजह जगह-जगह फूटी पाइप लाइन तो कोई अन्य कारण बताते हैं लेकिन विभागीय अधिकारी लाइन दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाते। जैसा कि मोहल्ले के जगदीश सैन कहते हैं कि नलों से तो पानी टपके महीना बीत गया, बीसियों बार शिकायतें भी दर्ज करवाई लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ भी नहीं हुआ। पड़ोसी महिला ने कहा कि यदि जलदाय अधिकारी रोजाना 23 टैंकर पानी भेज रहे हैं तो वे कहां जा रहे हैं? क्यों कि यहां तो आठ दिन में एकबार ही टैंकर आया है वह भी आधा।

जोरवाल है कि फोन ही नहीं उठाते...

शहर पानी के लिए त्राहिमाम कर रहा है लेकिन जलदाय महकमे के अधीक्षण अभियंता जगदीश प्रसाद जोरवाल फोन तक रिसीव नहीं करते। शहर में चल रहे जल संकट को लेकर उनकी राय जानने के लिए पत्रिका ने पांच बार फोन किए लेकिन उन्होंने रिसीव ही नहीं किए। फिर जब उनसे मिलने दफ्तर पहुंचे अलग ही जवाब सुनने को मिला।

अधीक्षण अभियंता बोले- मैं कुछ बताने के लिए अधिकृत नहीं हूं...

शहर में जलापूर्ति के मामले को लेकर पत्रिका संवाददाता जब उनसे मिलने पहुंचा तो एकबारगी तो वे व्यस्तता का हवाले देकर मिलने से ही बचते रहे। लेकिन जब मिलने को तैयार हुए तो यह कहते हुए जिम्मेदारी से बचने लगे कि मैं तो आपको कुछ भी जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हूं। पीआरओ से पूछो वे ही जवाब देंगे? जब उनको उनकी जिम्मेदारी का अहसास दिलाया तो बोले-ऐसा नहीं है फिलहाल शहर में 72 घंटों के अन्तराल में पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति की जा रही है। इसके अलावा प्रतिदिन शहर में 23 टैंकरों से भी जलापूर्ति की जा रही है। इधर, पीआरओ हेमलता सिसोदिया ने भी जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता की बातों काे झुठलाया। कहा कि वे क्यों देंगी जलदाय विभाग की जानकारी। उनको थोड़े ही योजनाओं की जानकारी है। वैसे भी मैं उनकी अधिकृत पीआरओ नहीं हूं।

यह है पानी की िस्थति

जलदाय विभाग के एक्सईएन उमेश कुमार मीणा बताते हैं कि शहर की जलापूर्ति अणगौर, पाड़ीव, धान्ता व दूधिया तालाब क्षेत्र के ट्यूबवैल से की जा रही है। जिसमें से 65 प्रतिशत पानी अणगौर क्षेत्र से लिया जा रहा है। अभी करीब 20 ट्यूबवैल है जिनमें 10 ऑपन वेल भी शामिल है। अगर जरूरत पडी़ तो और ट्यूबवैल खोदे जाएंगे।

एक्सपर्ट व्यू:

शहर में डेढ़ दजर्न बावडियां, उनकी सुध ली जाएं तो रोजाना सप्लाई जितना पानी माैजूद...

शहर में रियासत कालीन डेढ दर्जन से अधिक बावडियां हैं, जिसमें मुख्य रूप से सारणेश्वर बावडी, धारावती बावडी, चम्पावती बावडी, झालरा बावडी, कनकवाव, सरजावाव बावडी, खारी बावडी, देवेश्वरजी बावडी, चामुण्डा बावडी, कालकाजी बावडी, गणेश बावडी, सोमियों की बावडी, नीलकंठ बावडी शामिल है। जानकार बताते हैं कि यदि इन बावडि़यों की साफ-सफाई करके शहर में पानी वितरण की व्यवस्था की जाएं तो शहर में 72 घंटे की बजाय रोजाना जलापूर्ति की जा सकती है लेकिन इनकी सुध लेने को कोई आगे ही नहीं आ रहा। क्यों कि पहले भी इन बावडियों से ही शहर की प्यास बुझती थी। लेकिन अब इनमें से अधिकांश बावडि़यां साफ-सफाई व मरम्म्त की बाट जो रही हैं। इनमें इतना पानी है कि शहर को अन्य जलस्त्रोेत पर निर्भर नहीं रहना पड़े।

इनका कहना है...

शहर में तीन दिन में एकबार जलापूर्ति की जा रही है। साथ ही प्रतिदिन शहर में 23 टैंकरों से भी पानी की आपूर्ति की जा रही है।

-रामप्रसाद मालव, एईएन, सिरोही

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