सिरोही में यूनिट लगे तो तो सीधे तौर पर किसानों को 60 करोड़ का फायदा

- सौंफ हमारी तो यूनिट भी हो हमारी

By: Bharat kumar prajapat

Published: 22 Jun 2020, 08:48 AM IST

सिरोही. आबू की सौंफ का गुणवत्ता और स्वाद के मामले में कोई सानी नहीं है बावजूद इसके यहां के किसानों का फसल का पूरा दाम नहीं मिल रहा। कारण कि सौंफ बेचने के लिए गुजरात की ऊंझा मंडी पर निर्भर रहना पड़ता है और यहीं एक ऐसी बड़ी मंडी है जो सबसे निकट कह सकते हैं। ऊंझा मंडी की दूरी सिरोही जिले से हर साल करीब 60 से 70 करोड़ की सौंफ गुजरात की मंडी में जाती है। यदि उसे यहां छोटी.छोटी यूनिट खोलकर बाजार में उतारा जाए तो किसानों को सीधे तौर पर दुगुणे से ज्यादा दाम मिलेंगे और 60 से 70 करोड़ का फायदा होगा। कारण कि यहां यूनिट खुलेगी तो सौंफ अलग.अलग पैकिंग में बाजार में जाएगी। इससे सौंफ दाम भी दो से तीन गुणा अधिक मिलने तय है। साथ ही छोटे किसानों को बिचौलियों से छुटकारा मिल जाएगा। लघु उद्योग के रूप में विकसित करके कइयों को रोजगार भी मिलेगा। साथ ट्रांसपोर्ट के रूप में 50 से 60 लाख का अलग से फायदा होगा। गुजरात में जो टैक्स देना पड़ रहा है। उसमें भी कमी आ जाएगी।

जानकार बताते हैं
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉण् महेन्द्रसिंह चांदावत बताते हैं यहां से करीबन 60 से 70 करोड़ की सौंफ गुजरात की मंडी में जाती है। यहां यूनिट लगे तो सीधे तौर किसानों को दुगुणा फायदा होगा। कारण कि यूनिट में पैकिंग होते ही सौंफ सीधी बाजार में जाएगी। कोई मध्यस्थ नहीं होगा। इसके अलावा 50 से 60 लाख रुपए का ट्रांसपोर्ट खर्च बच जाएगा। अन्य खर्चों में कमी आएगी। बिचौलियों के झांसे में आने से किसान बच जाएंगे। रोजगार के अवसर मिलेंगे।

पूरा गणित इस तरह समझें

एक क्विंटल सौंफ करीब 12 हजार रुपए में बिकती है। मिनी ट्रक में करीब 3 टन सौंफ आती है। इस तरह कीमत मिली 3 लाख 60 हजार। लेकिन
गुजरात की उंझा मंडी तक आने जाने का एक मिनी ट्रक का किराया 10 हजार रुपए है। इस तरह 3 लाख 60 में से 10 हजार और कम हो गए। इसके अलावा टैक्स के भी डे? फीसदी कम हो गए। जबकि स्थानीय स्तर पर 10 हजार परिवहन के तो बचेंगे ही अलग अलग पैकिंग की कीमत भी दुगुनी मिलेगी।

यूनिट लगनी चाहिए
यदि यहां सौंफ की पैकिंग की;जैसे सौ ग्रामए दो सौ ग्राम आदिद्ध छोटी छोटी यूनिट लग जाए तो न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिल सकता है।

भानू प्रतापसिंह, महाप्रबंधकए जिला उद्योग केन्द्र सिरोही

Bharat kumar prajapat Reporting
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