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1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के जिस टैंक ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए, अब माउंट आबू में पर्यटक कर रहे दीदार, पढें पूरी खबर

माउंट आबू में नक्की झील के पास रखे टी-55 टैंक ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के 58 पेटेन टैंकों को किया था नेस्तनाबूद

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1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के जिस टैंक ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए, अब माउंट आबू में पर्यटक कर रहे दीदार, पढें पूरी खबर

1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के जिस टैंक ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए, अब माउंट आबू में पर्यटक कर रहे दीदार, पढें पूरी खबर

सत्यप्रकाश शर्मा

India-Pakistan War 1971सिरोही/माउंट आबू। 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के अदभुत शौर्य व पराक्रम के किस्से सुनकर आज भी देशवासियों में राष्ट्रप्रेम का जज्बा पैदा होता है। यह युद्ध स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इस युद्ध के किस्से-कहानियां आज भी लोगों के अंदर देशभक्ति के जज्बे को कई गुना बढ़ा देती है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान ने भारत के सामने अपने 93,000 सैनिकों के साथ घुटने टेक दिए थे। इस युद्ध में जलवा दिखाने वाला टी-55 टैंक आज भी पर्यटन स्थल माउंट आबू में भारतीय सेना के शौर्य व पराक्रम के इतिहास की याद दिलाता है। यहां आने वाले पर्यटक इसका दीदार कर इतिहास के पन्नों में दर्ज वीर जवानों की शौर्य गाथाओं को याद करते हैं।


जानकारी के मुताबिक टी-55 टैंक को भारतीय सेना में 1967-68 के दौरान शामिल किया गया था। इसके बाद 1971 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर इस टैंक ने अद्भुत प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के कई टैंकों को नेस्तनाबूद कर दिया था।

युद्ध में अपना जलवा दिखाने वाले टी-55 टैंक को करीब एक साल पहले स्थानीय प्रशासन, आर्मी व नगर पालिका के संयुक्त तत्वावधान में यहां माउंट आबू में नक्की झील परिक्रमा पथ पर कानोरा घाट के समीप दयानंद गार्डन में सार्वजनिक अवलोकनार्थ स्थापित किया गया था। तब से हर रोज सैंकड़ों पर्यटक इसका दीदार करते हैं। बहुत से पर्यटक यादगार रूप में इसके साथ सेल्फी लेते हैं। नगर पालिका अध्यक्ष जीतू राणा व एईएन नवोदित सिंह ने बताया कि यह टैंक करीब एक साल पहले स्थापित किया गया था। नगरपालिका ने इसके रखरखाव के लिए यहां एक गार्ड भी नियुक्त कर रखा है।


पाकिस्तान के 58 पेटेन टैंकों को कर दिया था नेस्तनाबूद
जानकार सूत्रों के मुताबिक पर्यटन स्थल माउंट आबू में स्थापित टी-55 टैंक को भारतीय सेना में 1967-68 के दौरान शामिल किया गया था। इसके बाद 1971 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर अद्भुत प्रदर्शन करने वाले इस टैंक ने पाकिस्तान के 58 पेटेन टैंकों को नेस्तनाबूद कर दिया था। भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर के मुख्य आधार रहे टी-55 पाकिस्तानियों के लिए भारी मुसीबतों का करण बना रहा। युद्ध के दौरान शकरगढ, फाजिल्का, छंब से लेकर जैसलमेर से लोंगेवाला तक पाक के पेटेन टैंकों को तबाह करने में कामयाबी हासिल की थी।

देशभक्ति का भर रहा जज्बा

माउंट में स्थापित यह टैंक युवाओं को इतिहास के पन्नों में दर्ज भारतीय सेना के शौर्य व वीरता से परिचित कराकर देशभक्त का जज्बा पैदा कर रहा है। इस टैंक का वजन करीब 36 टन बताया जाता है।

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