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मीणा समाज के महाकुंभ गौतम ऋषि महादेव वार्षिक मेले में उमड़े मेलार्थी

- कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद इस बार आयोजित किया गया है मेला - मेले को लेकर मीणा समाज में जबरदस्त उत्साह, आज सुबह 8. 40 बजे होगी गंगा प्रवाहित

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मीणा समाज के महाकुंभ गौतम ऋषि महादेव वार्षिक मेले में उमड़े मेलार्थी, आज शुभ मुहूर्त में होगी गंगा अवतरित

पोसालिया. गौतमजी मेले में सजे हाट-बाजार व झूले।

पोसालिया. कस्बे से 15 किलोमीटर दूर अरावली की पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित गौतम ऋषि महादेव मंदिर का वार्षिक मेला बुधवार से उमंग व उत्साह के साथ आरम्भ हो गया। मेले में आस्था का सैलाब उमड़ता देखा गया। मेला 15 अप्रेल तक चलेगा। मेले में आस्था का ज्वार उमड़ने के साथ मेलार्थियों के मनोरंजन के लिए झूले आदि भी भारी तादाद में लगे हैं। खास तौर पर महिलाओं के लिए श्रृंगार के सामान की खरीदारी के लिए विशाल हाट-बाजार सजा है। मेले में पग-पग पर उत्साह सिर चढ़कर बोलता दिखाई दिया। पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े मेलों में शुमार मीणा समाज के आराध्यदेव गौतम ऋषि महादेव का वार्षिक मेला कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद भरा है। जिसमें करीब तीन लाख श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की उम्मीद है। ऐसे में मेले को लेकर मेला स्थल पर गौतम ऋषि ट्रस्ट ग्यारह परगना मीणा समाज सिरोही, जालोर, पाली की ओर से व प्रशासन के सहयोग से मेलार्थियों की सुविधाओं के लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। बुधवार अपराह्न से पारम्परिक वेशभूषा में विभिन्न वाहनों से मेलार्थियों के लवाजमे पहुंचने शुरू हो गए। भूरिया बाबा के जयकारों व यशोगान की गूंज से अरावली की सूनी वादियां चहक उठी। ट्रस्ट अध्यक्ष उमाराम मीणा बिलर ने बताया कि इस बार 14 अप्रेल को सुबह 8.40 बजे गंगा मैया प्रवाहित होगी। जहां पर मीणा समाज द्वारा विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। समाज के लोग पिछले दिनों अपने-अपने घर-परिवार में दिवगंत हुए लोगों की अस्थियां विसर्जित करेंगे। मेले की व्यवस्था का जिम्मा पंच-पटेलों के साथ युवा कार्यकर्ता बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। इधर मंदिर परिसर को रंग-रोगन कर रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। मेले में हर वर्ष की भांति सिरोही, पाली व जालोर जिलों समेत पड़ोसी राज्यों से मीणा समाज के लोग लाखों की संख्या में मेले में पहुंच रहे हैं। विशाल मेला क्षेत्र में हाट बाजार, झूले, पेयजल व्यवस्था के साथ मेले तक पहुंचाने के सभी रास्तों को दुरुस्त करने का कार्य भी मेलार्थियों की सुविधार्थ किया गया है।

मेले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हमेशा की तरह इस बार भी समाज की ओर से मेले में शराब पीकर आने, हथियार लाने, ओरण भूमि में हरे पेड़ों को काटने, वीडियो का स्टॉल लगाने, किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से वीडियोग्राफी करने, रात 8 बजे बाद मेले में महिलाओं के घूमने, झगड़ा फसाद करने, मेले में किसी संस्था की रसीद काटने, किसी संस्था की ओर से बैज-बिल्ले जारी करने, मुंह पर कपड़ा बांधने पर पूर्णतया मेला क्षेत्र में पाबंदी रहेगी।

मेले के दिन मंदिर के पास पवित्र कुंड बना दिया जाता है। जिसे गंगा कुंड गंगा बेरी के नाम से भी पुकारते हैं। मेले के दिन मीणा समाज के लोग कई युगों से चल रही परम्परा का निर्वहन करते हुए अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन इस पवित्र कुंड में करते हैं। इससे पूर्व इस पवित्र कुंड में गंगा के पानी का प्रवाह होता है। यह मान्यता है कि गंगा मैया के कुंड में अस्थियों का विसर्जन करने से उनके पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है।

मेले में सदियों से चली आ रही सालों पुरानी परम्परा का निर्वहन करते हुए मीणा समाज के लोग अपने अस्थाई बसेरों ऐताइयों में अपने रिश्तेदारों, मित्रों तथा विशेषकर दामाद की मेहमाननवाजी करते हैं। इस अवसर पर महिलाएं लोकगीत गाती हैं। मेले में शादी योग्य युवक-युवतियों के रिश्ते भी तय किए जाते हैं। बसेरों में रिश्तेदारों, भाइयों, मित्रों को भोजन, मिष्ठान, चूरमा की मनुहार की जाती है।

इस बार मेले की तैयारियों के लिए विगत 29 मार्च को कलक्टर डॉ. भंवरलाल व विधायक संयम लोढ़ा की मौजूदगी में गौतम ऋषि महादेव मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारियों, मीणा समाज ग्यारह परगनों के पंच-पटेलों के साथ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई थी। डीएसपी परसाराम चौधरी ने समाज को आश्वस्त किया था कि मेले में वर्दीधारी पुलिस का प्रवेश नहीं होगा। मेले के बाहर लगने वाली अस्थाई चौकी में दो पुलिस अफसर, 4 महिला कांस्टेबल व 32 कांस्टेबल वर्दी में रहेंगे, जो मेला कमेटी की इजाजत पर ही कोई कार्रवाई करेंगे। मेले में ढाई से तीन लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान होने से ऐतिहासिक तौर पर मेला स्थल पर सादे कपड़ों में 86 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। जिसमें 3 एसआई, 5 एएसआई, 13 हैड कान्स्टेबल शामिल हैं। मेला परिसर से बाहर 195 वर्दीधारी पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।

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