
लौट आए सात समन्दर पार से, मारवाड में उगाए अनार
जैसा कि नवदीप गुलेच्छा बताते हैं कि इंग्लैण्ड में जॉब के दौरान उनके मन में स्वदेश का प्यार उमड़ा और वे जॉब छोड़कर मादरे वतन लौट आए। मूलतरू जोधपुर के रहने वाले नवदीप ने यहां सिरोही से करीब 15 किलोमीटर दूर पालड़ी एम के निकट फोरलेन के समीप 70 बीघा जमीन में अनार की खेती की शुरुआत की। उन्होंने यहां अनार के साढ़े बारह हजार पौधे लगाए और उनके नीचे वाले भाग पर पॉलीथिन का पेपर लगाया ताकि उसके आसपास खरपतवार नहीं उगे और पौधे को पर्याप्त पानी और नमी मिल सके। ये बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति का उपयोग करते हैं ताकि पानी व्यर्थ नहीं जाए। इनके चार ट्यूबवैल हैं और उनका पानी पहले ये बड़ी हौदी में डालते हैं और फिर वहां से बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से पाइप के जरिए पौधों तक जाता है। हौदी में पानी जमा करने के पीछे उनका कहना है कि कभी पानी का संकट हो जाए या मोटर-मशीन खराब हो जाए तो भी उसमें करीब एक महीने तक का पानी सहेज कर रखा जा सकता है। वैसे अनार की खेती के लिए कम पानी की जरूरत होती है। ये साल में एक बार अनार की पैदावार लेते हैं और अनार का पौधा 30 साल तक उपज देता है। पिछले साल उन्होंने सवा करोड़ से अधिक कमाए थे और इसबार इन पौधों पर फल जिस तरह से दकदम है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब दो करोड़ की कमाई हो जाएगी। ये 15 दिन में बाजार में बेचने को भेज दिए जाएंगे।कारण कि जैसे-जैसे अनार के पौधे की उम्र बढ़ती जाएगी वैस-वैसे उपज अधिक होती चली जाती है। वैसे अनार के पौधे के तने की मजबूती के लिए साल में दो बार टहनियों की कटाई की जाती है। समय-समय पर पौधों के आसपास गोबर का खाद भी डालते हैं ताकि पौधों का विकास अच्छा हो।
आजकल ये पतीते और नींबू की खेती भी करने लगे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। साथ ही, किसानों को प्रेरित कर रहे हैं कि अनार की खेती से तीन-चार बीघा जमीन से भी सालाना लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं।
पुरस्कार भी मिले
नवदीप को एग्रीकल्चर में नए प्रयोग के लिए नेशनल लेवल का मोस्ट इनोवेटिव फॉर्मिंग तकनीक अवार्ड दिया गया है। कृषि में बेहतरी के लिए सिरोही कलक्टर ने सम्मानित किया था। इसके अलावा 26 जनवरी को जोधपुर नगर निगम ने भी सम्मानित किया है।
बारिश का पानी भी सहेजते हैं...
जैसा कि नवदीप बताते हंै, बारिश का पानी भी हौदी में सहेज कर रखते हैं। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में हौदी में पानी भरने के लिए एक साइड के हिस्से को ढलान का रूप देते हैं ताकि सहजता से वह भर जाए। हौदी भरने के बाद खेती के लिए एक महीने तक का पानी मिल जाता है।
जैविक तरीके से नींबू उगाए
नवदीप ने जैविक तरीके से कागदी नींबू के पौधे भी उगाए हैं और उनसे भी लाखों की आमदनी की उम्मीद है। कागदी नीम्बू राजस्थान में मशहूर है। नीम्बू 15-20 दिनों तक खराब नहीं होता यानी पौधे से तोडऩे के बाद इसे पखवाड़े तक सहेज कर रख सकते हैं।
Published on:
24 Dec 2021 02:56 pm
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