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सिरोही- भगवान रे! दस लाख की आबादी पर मात्र सात दमकल, खबर पर क्लिक करें और जानिए कहां कितने दमकल

सिरोही में बड़ी तो अन्य उपखंड मुख्यालयों पर छोटी दमकल से ही चल रहा काम

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मौसम ने करवट बदली है। पारा दिनोंदिन बढ़ेगा। ऐसे में जाहिर सी बात है आग की घटनाएं भी बढ़ेंगी। ऐसे में आग पर काबू पाने के लिए दमकल तो चाहिए लेकिन जिले में उपलब्ध दमकलों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। खुदा न खास्ता बड़ी घटना हो जाए तो आग पर काबू पाने के लिए भगवान ही मालिक है।
जिले में हर साल गर्मियों में आग की घटनाएं होती हैं, जिससे काफी नुकसान भी झेलना पड़ता है। जिले की पांच तहसीलों के पास उपलब्ध दमकलों का जहां एक ओर दम निकल रहा है, वहीं इनकी संख्या गांवों की तुलना में बहुत कम होने के कारण एक साथ दो या अधिक घटनाएं होने पर नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।
जिले में 2011 की जनगणना में आबादी 10,36,346 थी। इतनी आबादी पर सात दमकल के भरोसे आग बुझाई जाती है। हालांकि समय-समय पर निजी कंपनी के दमकल वाहन मौके पर पहुंच जाते हैं।

जिला मुख्यालय चार, एक खराब

जिला मुख्यालय पर चार दमकल हैं लेकिन उसमें से एक काफी समय से खराब है। तीन की हालात ठीक-ठाक है। दमकल कार्यालय में रखे अग्निशमन यंत्र भी कई साल पुराने हैं। सोमवार को एक निजी स्कूल के बच्चे दमकल के बारे में जानकारी लेने आए तो पाइप से पानी ही नहीं निकल रहा था, बाद में एक कर्मचारी ने गाड़ी के ऊपर का नोजल शुरू किया। 101 नम्बर साल भर से बंद पड़ है।

रेवदर में नहीं अग्निशमन वाहन
जिले के रेवदर उपखंड मुख्यालय पर दमकल की व्यवस्था तक नहीं है। रेवदर तहसील की 38 ग्राम पंचायतों में 134 गांव होने के बावजूद एक भी दमकल नहीं है। आबूरोड, पिण्डवाड़ा, शिवगंज में एक-एक दमकल है। लंबी दूरी वाले गांवों तक एक दमकल का पहुंचना कठिन होता है। ऐसे में ग्रामीण निजी साधनों और टैंकरों के भरोसे रहते हैं, लेकिन अधिक ऊंचाई पर आग लगने की स्थिति में टैंकर बेबस साबित होते हैं। जिलेभर में अब खेतों में फसल पकने को है। ऐसे में रोजाना कहीं न कहीं आग की घटना की आशंका रहती है। माउंट आबू में भी दमकल का टोटा है, हालांकि एयरफोर्स की दमकल से काम चलाया जाता है। यहां पर जीप दमकल है।

आबूरोड के वाहन में नहीं दम

आबूरोड के आकराभट्टा दमकल केन्द्र पर बहुत छोटा वाहन है। इसमें पानी की क्षमता ही महज तीन हजार लीटर की ही है। आग की बड़ी घटना होने पर इतने पानी से सिर्फ फुहारें ही पड़ सकती हैं। बड़ा हादसा होने पर गेल, आईओसी व भंसाली के दमकल वाहन मौके पर पहुंचते हैं। अगर ये दोनों वाहन समय पर नहीं पहुंचें तो तबाही की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।कई बार तो मौके से खुद दमकलकर्मी फोन कर इन कम्पनियों के दमकल वाहन बुलाते हैं। आबूरोड जिले का सबसे बड़ा शहर है। आबादी भी साठ हजार के करीब है।दो इंडस्ट्रीयल एरिया व दो ग्रोथ सेन्टर हैं। आसपास का ग्रामीण इलाका भी बड़ा है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन ने बड़ा दमकल वाहन लेने के बारे में कभी नहीं सोचा।

पांच सौ लीटर के भरोसे
पिण्डवाड़ा तहसील में 37 ग्राम पंचायत हैं लेकिन यहां पर भी दमकल का टोटा है। पालिका परिसर में भी पांच सौ लीटर क्षमता वाला वाहन खड़ा रहता है। हालांकि यहां पर जेके व बिनानी की दमकल समय-समय पर सेवाएं देती हंै, पर पालिका क्षेत्र में ज्यादा पानी की क्षमता वाला वाहन जरूरी है। पिण्डवाड़ा शहर की तीस हजार आबादी है। दमकल चालक भी नहीं है, ऐसे में फोन आने पर उपस्थित होने वाले को मौके पर भेज दिया जाता है।

24 पंचायतों पर मात्र एक
शिवगंज उपखण्ड मुख्यालय पर मात्र एक फायर ब्रिगेड ही है जिसकी क्षमता पांच हजार लीटर है। टायर खराब हैं। इसके अलावा भी कई तकनीकी कमी होने के कारण पालिका प्रशासन को मरम्मत के लिए ज्ञापन दिया। इसके बावजूद कार्यवाही नहीं हुई। जरूरत होने पर सुमेरपुर नगर पालिका व सुमेरपुर कृषि उपज मण्डी से फायर ब्रिगेड मंगानी पड़ती है। पंचायत समिति क्षेत्र में 24 ग्राम पंचायत हैं।