6 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सत्य बहुत बड़ी तपस्या

माउंट आबू. आचार्य पाश्र्वचंद्र ने कहा कि भगवान सत्यम् शिवम् सुन्दरम् है। सत्य अपने आप में बहुत बड़ी तपस्या है, यह तपस्या करने वाले साधक के मन में बहुत ही साहस का भंडार होता है। साहसी व्यक्ति ही सत्य बोल सकते हैं।

less than 1 minute read
Google source verification
sirohinews

सत्य बहुत बड़ी तपस्या

माउंट आबू. आचार्य पाश्र्वचंद्र ने कहा कि भगवान सत्यम् शिवम् सुन्दरम् है। सत्य अपने आप में बहुत बड़ी तपस्या है, यह तपस्या करने वाले साधक के मन में बहुत ही साहस का भंडार होता है। साहसी व्यक्ति ही सत्य बोल सकते हैं। जब व्यक्ति के भीतर से हिंसा, झूठ, चोरी, दुराचार आदि अवगुण नष्ट हो जाते हैं, तब वहां सत्य भगवान के प्यार का वास हो जाता है। वे सोमवार को रघुनाथ मंदिर में जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान, संस्कार के शिविरार्थियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन को सहज सरल बनाने के लिए सत्य का गुण होना चाहिए। अगर सत्य नहीं है तो वहां मानवता व दानवता में अंतर नहीं रहता। असत्य बोलने वाले व्यक्ति को सदैव भय बना रहता है। वह अपने असत्य को ढंकने के लिए नित नए तरीकों से असत्य को छिपाने की असफल चेष्टा करता है। सत्यव्रती जीवन में सदैव सफल रहने के साथ सबके विश्वासपात्र होते हैं। सत्य के बल पर ही विश्वास, श्रद्धा, समर्पणता का जन्म होता है। सत्य ही नारायण है अर्थात भगवान है। भगवान विष्णु को सत्यनारायण कहा गया है। जो सत्यभाषी है वे वास्तव में सत्यनारायण है। जीवन में सत्य बोलने का सदैव प्रयास करना चाहिए, क्योंकि सत्य ही पाप का निवारण करने वाला है। आचार्य डॉ. पदमचंद्र, जोधपुर के जितेंद मेहता, हेमंत कांकरिया, अशोक कोठारी, सुरेशचंद रूणवाल, संजय पींचा, आलिशा बाफना ने भी विचार व्यक्त किए। जयजाप समिति अध्यक्ष शान्तिलाल चोपड़ा के नेतृत्व में सात दिवसीय जयजाप कार्यक्रम की विधिवत स्थापना कर जयजाप आरंभ किया गया।