23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कश्मीरी लाल मिर्च को टक्कर दे रही है सिरोही की ‘सिलासणी मिर्च

सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा ब्लॉक के सिलासण गांव के सभी काश्तकार करते हैं मिर्च की खेती और प्रत्येक किसान सालाना कमाता है कम से कम तीन से चार लाख रुपए

3 min read
Google source verification
,

कश्मीरी लाल मिर्च को टक्कर दे रही है सिरोही की 'सिलासणी मिर्च,कश्मीरी लाल मिर्च को टक्कर दे रही है सिरोही की 'सिलासणी मिर्च

अमरसिंह राव

सिरोही. तमाम प्रकार की सब्जियों, दाल, कढ़ी, अचार, चटनी आदि को तीखा व चटपटा बनाने में तीखापन लिए सुर्ख लाल मिर्च प्रमुख मसाला मानी जाती है। काश्तकारों ने मिर्च को कैश-क्रॉप के रूप में अपना रखा होने से इसकी खेती बहुतायत में करते हैं, पर सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा ब्लॉक में आरासणा-नांदिया के बीच स्थित सिलासण गांव ऐसा है, जिसकी आबादी करीब ढाई सौ लोगों की है। गांव में करीब पांच दर्जन परिवार बसे हुए हैं और ये सभी मूलरूप से एक ही परिवार के हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि गांव के ये सभी पांच दर्जन परिवार प्रमुख तौर पर मिर्च की खेती ही करते हैं। मिर्च की खेती से वे हर साल अच्छी खासी कमाई कर लेते हैं। कम से कम पांच बीघा जमीन में मिर्च की खेती करने वाला शायद ही ऐसा कोई काश्तकार होगा, जो साल में तीन-चार लाख रुपए की कमाई नहीं करता हो। मसलन गांव के कमोबेश सभी परिवारों का प्रमुख व्यवसाय खेतीबाड़ी है और सभी मिर्च की खेती कर अपनी आजीविका चलाते हैं।

कम लागत और आमदनी भरपूर, घर बैठे ही बिक जाती है पैदावार

दरअसल जिस तरह आबूरोड-अहमदाबाद मार्ग पर कलोल के पास सई-शेरथा और जोधपुर में मथानिया की मिर्च विख्यात है, उसी तरह सिलासण की मिर्च भी खूब विख्यात है। तभी तो काश्तकारों को अपनी पैदावार लेकर कहीं बाहर बेचने नहीं जाना पड़ता। अक्टूबर-नवम्बर में बुवाई के बाद मिर्च फरवरी मार्च में पककर तैयार होते ही, खरीदार खुद मिर्च खरीदने के लिए इन काश्तकारों की दहलीज पर पहुंच जाते हैं। आसपास गांवों के साथ पूरे सिरोही जिले व दूरदराज से भी कई लोग सिलासण की मिर्च खरीद कर ले जाते हैं। फरवरी-मार्च में रविवार व अन्य सार्वजनिक अवकाश के दिन तो खरीदारों की भीड़भाड़ से ऐसा लगता है कि मानों वहां मिर्च की मंडी लगी हो। इन दिनों सिरोही-पिण्डवाड़ा मार्ग से आरासणा अम्बाजी जाने वाले मार्ग पर सिलासण जाने वाले वाहन चालकों की रेलमपेल लगी रहती है। इन दो माह आपको हर घर की छत पर व गांव से सटी पहाड़ी पर लाल मिर्च सूखती दिखाई देगी। गुजरात व महाराष्ट्र में व्यवसायरत मूल सिरोही जिले के कई लोग सिलासण से मिर्च खरीदकर ले जाते है, ताकि सब्जी का जायका लजीज बना रहे।

टॉप क्वॉलिटी, लाल सुर्ख, तीखापन और दाम सस्ते

खरीदारों के मुताबिक सिलासण की मिर्च की क्वॉलिटी व तीखापन के बारे में कोई शक-शुबहा नहीं किया जा सकता। काश्तकार भी क्वॉलिटी के प्रति इतने संवेदनशील हैं कि वे बेचने से पहले माल की अच्छी तरह से छंटाई कर लेते हैं। कोई मिर्च खराब होने या कच्ची रहने के कारण रंग फीका होने पर उन्हें ढेर से हटा लेते हैं। कई सालों से 'सिलासणी मिर्चÓ खरीदकर ले जाने वालों का कहना है कि यह मिर्च सालभर पड़ी भी रह जाए तो इसका रंग फीका नहीं पड़ता। जैसा आज लाल सुख रंग है, वैसा ही सालभर बाद भी होगा। क्वॉलिटी की तुलना में प्रति किलो 200 से 220 रुपए तक के दाम खास मायने नहीं रखते।

कृषि विभाग को करनी चाहिए मिट्टी व जलवायु की स्टडी

काश्तकारों ने बताया कि वैसे तो मिर्च हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है, पर इसके अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली जमीन जिसमें नमी हो, इसके लिए अनुकूल होती है। अच्छी क्वॉलिटी की पैदावार देती है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग को चाहिए कि वह सिलासण के आसपास के गांवों की मिट्टी व जलवायु का परीक्षण करें। यदि मिर्च की खेती के लिए जलवायु व मिट्टी अनुकूल पाई जाए तो वहां के काश्तकारों को मिर्च की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। ताकि, वे भी बेहतरीन आमदनी कर सकें।

आसपास के एरिया में केवल हमारे गांव में ही मिर्च की खेती की जाती है। बाकी आसपास कहीं पर भी मिर्च की खेती नहीं होती। हम पारम्परिक तरीके से मिर्च की खेती करते हैं। यहां की मिर्च गुजरात, महाराष्ट्र व आसपास के इलाकों में जाती है। हमें कहीं बाहर जाकर नहीं बेचनी पड़ती।

- हड़वन्तसिंह देवड़ा, सिलासण
.....................................................

मैं पांच-छह बीघा में मिर्च की खेती करता हूं। यह खेती करने में पूरे आठ माह लग जाते हैं। सालाना मुझे इससे तीन से पांच लाख रुपए की आय हो जाती है।

- भैरूसिंह देवड़ा, किसान, सिलासण
...............................................................

मजदूरों के साथ काम करना पड़ता है। जो भी मिर्च दागी या खराब होती है, उसे हम मिर्च के ढेर से अलग कर देते हैं। घर का कार्य निपटाकर बस इसी कार्य में जुट जाते हैं। हमारा उद्देश्य ग्राहकों को अच्छी क्वॉलिटी की मिर्च मुहैया कराना है।

- बेबी कंवर, गृहिणी, सिलासण
...............................