
श्रीराम के जैकारों से गूंजा वातावरण, गाजे-बाजे से मंदिर में बिराजे भगवान
मंडार. प्रतिमाओं के दर्शन को आतुर भक्त, श्रीराम के जैकारों से गुंजायमान वातावरण, चहुं ओर धार्मिक रंग में रंगा माहौल। कुछ ऐसा ही नजारा था गुरुवार को मालीपुरा कुसमा में। मौका था श्रीरामचन्द्र मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव का। महंत कैलाशगिरि के सान्निध्य व ट्रस्ट संरक्षक आदित्य प्रतापसिंह देवड़ा की मौजूदगी में दोपहर में निर्धारित समय पर दत्तात्रेय, पातालेश्वर, भद्रकाली मां व रामदरबार, नवग्रह, बारह ज्योर्तिलिंग, शिवगिरी महाराज समेत एक दर्जन से अधिक मंदिरों में 77 प्रतिमाओं की स्थापना कर प्राण-प्रतिष्ठा की गई। वहीं पंचकुण्डात्मक व ग्यारह कुण्डात्मक महारूद्र एवं विष्णुयाग में पूर्णाहुति से साथ तीन दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ। कार्यक्रम में पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेमगिरी, शिकारपुरा महंत दयाराम, थानापति महंत नरेन्द्रगिरी, धनियावाड़ा महंत गणेशगिरी, रविधाम महंत सत्यानंद, बडगांव सूरजकुण्ड महंत लहरभारती, मंडवारिया मठ महंत तीर्थगिरी, महंत वीरमगिरी, जलौत्रा महंत ओमकारीगिरी का भी सान्निध्य रहा।
सज-धज कर पहुंचे श्रद्धालु
प्रतिष्ठा को लेकर भक्तों में उत्साह नजर आ रहा था। श्रद्धालु सवेरे जल्दी ही नए परिधानों में सज-धज कर मंदिर पहुंचने शुरू हो गए। दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रही।
भक्तों ने यज्ञशाला परिक्रमा की
यज्ञशाला में वेद मंत्रों को सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर नजर आए। वहीं भक्तों ने कतार में यज्ञशाला की परिक्रमा कर मन्नत मांगी। यज्ञाचार्य शास्त्री हितेन्द्र उपाध्याय एवं शास्त्री तुषार मेहता ने महारूद्र होम, विष्णुयाग, शांतिक पौष्टिक होम करवाया। बाद में प्रतिष्ठा होम, स्थाप्य होम, उत्तर पूजन, बलिदान व पूर्णाहुति के बाद महाआरती, फले-चुन्दडी का आयोजन हुआ।
पुलिस जाप्ता रहा तैनात
कार्यक्रम के दौरान कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पुलिस का पर्याप्त जाप्ता तैनात रहा। थाना प्रभारी गोपालसिंह राठौड़ के नेतृत्व में जाप्ता तैनात रहा।
भजनों पर झूमे श्रोता
प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत पूर्व रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया। इसमें रामावतार सैनी एंड पार्टी की ओर से एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी गई। इस मौके अध्यक्ष कृष्णवीरसिंह देवड़ा, सुमेरसिंह देवड़ा, महावीरसिंह देवड़ा, निपेन्द्रसिंह देवड़ा, दशरथसिंह देवड़ा, विक्रमसिंह देवड़ा आदि मौजूद थे।
धर्मसभा में संतों ने किए प्रवचन
इस दौरान धर्मसभा का भी आयोजन किया गया। इस मौके पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा जिस भूमि पर संत पहुंचते हैं, वह भूमि तीर्थ बन जाती है। उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल भगवान के नाम के स्मरण से भी भव को पार किया जा सकता है। महंत चेतनगिरी ने कहा जहां संत है वहां बसंत है। मन में भेद आने पर ही रुकावट आती है। साध्वी राधागिरी ने कहा संतों का जीवन परोपकार के लिए हैं। इस मौके जूना अखाड़ा सचिव महंत रामेश्वरगिरी, महंत सिद्धेश्वरगिरी, कानून सलाहकार मंत्री महंत धनन्जयगिरी, महंत श्यामगिरी, कच्छभुज पिंगलेश्वर महादेव मंदिर महंत पुरुषोत्तमगिरी, सगालिया मठ महंत प्रेमभारती, महंत नागेश्वरगिरी, सवली जावल महंत कैलाश व रूपपुरी का सान्निध्य रहा।
युवाओं ने संभाली व्यवस्था
कार्यकर्ताओं व युवाओं ने विभिन्न व्यवस्थाओं को संभाला। आंजणा युवा संगठन 14 गांव मंडार थाला की ओर से नींबू-पानी व छाछ की व्यवस्था की गई।
आज खुलेंगे पट
मंदिर में शुक्रवार को भी विविध कार्यक्रम होंगे। अध्यक्ष ने बताया कि सवेरे सूर्य की पहली किरण के साथ ही द्वारोघाटन कर शंखनाद के साथ ही पट खोले जाएंगे। इसके बाद महाआरती की जाएगी।
Published on:
23 May 2019 08:22 pm
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