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पारम्परिक वेशभूषा में सजे-धजे भक्तों की टोलियों के जैकारों से गूंजी अरावली की वादियां

पोसालिया. पारम्परिक वेशभूषा में सजधज कर हाथों में छाता थामे ट्रैक्टर-ट्रोलियों, बैलगाडिय़ों व वाहनों में गुजरते लोग। भूरिया बाबा के जयकारों से गुंजायमान वातावरण। कुछ ऐसा ही नजारा था शनिवार को चोटीला और आस-पास के गांवों में देखने को मिला। मौका था चोटीला सरहद में सूकड़ी नदी तट पर स्थित मीणा के समाज आराध्य गौतम ऋषि महादेव मेले को लेकर श्रद्धालुओं के पहुंचने का।

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पारम्परिक वेशभूषा में सजे-धजे भक्तों की टोलियों के जैकारों से गूंजी अरावली की वादियां

पोसालिया. पारम्परिक वेशभूषा में सजधज कर हाथों में छाता थामे ट्रैक्टर-ट्रोलियों, बैलगाडिय़ों व वाहनों में गुजरते लोग। भूरिया बाबा के जयकारों से गुंजायमान वातावरण। कुछ ऐसा ही नजारा था शनिवार को चोटीला और आस-पास के गांवों में देखने को मिला। मौका था चोटीला सरहद में सूकड़ी नदी तट पर स्थित मीणा के समाज आराध्य गौतम ऋषि महादेव मेले को लेकर श्रद्धालुओं के पहुंचने का। तीन दिवसीय मेले को लेकर मीणा समाज के लोग मेला स्थल पहुंचने शुरू हो गए। इसी के साथ शनिवार को गौतम ऋषि महादेव मंदिर में तीन दिवसीय मेले का आगाज हो गया। ऐसे में चोटीला से होकर मेला स्थल की ओर जाने वाला मार्ग दिनभर व्यस्त रहा। यहां दिनभर वाहनों की आवाजाही नजर आई। मेला रविवार को परवान पर रहेगा और सोमवार को सम्पन्न होगा। मीणा समाज के इस धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक मेले में सिरोही, जालोर, पाली सहित दूरस्थ क्षेत्र से श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
परम्परा बरकरार
मेले में राजतंत्र से चली आ रही परम्परा आज भी बरकरार है। ग्राम्य संस्कृति की झलक यहां पर प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलती है। लेकिन समय के साथ मेले का विकास और विस्तार भी हुआ है। उत्तरोतर यह मेला सामाजिक व आर्थिक विकास का साक्षी बनता जा रहा है। पहले जहां कच्ची सड़क थी, वहां अब डामरीकृत पक्की सड़क बन जाने से आवागमन सुविधा जनक हो गया है।
मेला स्थल पर माकूल बंदोबस्त
मेला स्थल पर माकूल बंदोबस्त किए गए हैं। मंदिर परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित की गया है। मेला क्षेत्र की सभी व्यवस्थाएं परम्परागत ढंग से ११ परागनों की गठित मेला कमेटी द्वारा की जा रही है। मेला क्षेत्र में पारम्परिक तौर पर वर्दी में पुलिस प्रवेश निषेघ के चलते सादी वर्दी में ही मीणा समाज के पुलिसकर्मी व समाजबंधु ट्रस्ट निर्देशन में अलग-अलग व्यवस्था संभाल रहे हैं।
अनुशासन की मिसाल
ये मेला अनुशासन की भी मिसाल है। यहां के परम्परागत नियम ऐसे है कि कोई झगड़ा-फसाद नहीं होता है। मेले में हथियार व शराब पर पाबंदी है। इतना नहीं मेले की तिथि की घोषणा के साथ ही मीणा समाज में मांस व मदिरा पर पूर्णतया प्रतिबंध लग जाता है। मेले में रात आठ बजे के बाद हाट-बाजार में महिलाओं के घूमने पर पाबंदी है। वहीं रात १० बजे बाद झूले व अन्य करतब का संचालन भी सवेरे ६ बजे तक बंद कर दिया जाता है।
आज होगा गंगा अवतरण, सजी एताइयां
मेले में आने वाले ११ परगनों के अस्थाई निवास के लिए परगना और ग्रामवार रूप से पूर्व निर्धारित स्थल पर एताइयों को सजाया गया है। इसमें ग्रामवार परिवार निवास करते हुए कई सामाजिक परम्पराओं का निर्वहन करेंगे। वहीं मान्यतानुसार रविवार को दोपहर २.७ बजे गंगा अवतरण होगा। जहां गंगा पूजन वंदन के साथ विगत वर्षभर में दिवगंत हुए परिजनों की अस्थियों का गंगाकुंड में रस्मो-रिवाज के साथ विसर्जन किया जाएगा। इसके बाद एताइयों में पहुंचकर रंग बदलने की प्रथा निभाएंगे।
...और ये माहौल भी आएगा नजर
एक ओर जंवाई राजा के स्वागत में गीतों की प्रस्तुतियां चलेगी तो दूसरी तरफ विगत सालभर में दिवगंत हुए परिजनों का शोक रंग बदलने की रस्म के साथ खुशी में तब्दील होता नजर आएगा। वहीं लड़के-लड़कियों के रिश्ते भी तय किए जाएंगे।
प्रशासन ने भी की व्यवस्था
मेले को लेकर प्रशासन की ओर से भी व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र से बाहर वीर बावसी के समीप जिला कलक्टर सुरेन्द्र कुमार सोलंकी, एसपी कल्याणमल मीणा, शिवगंज एसडीएम भागीरथराम चौधरी, तहसीलदार रणछोड़लाल के निर्देशन में अस्थाई चौकी व कंट्रोल रूम स्थापित कर पुलिस का पर्याप्त जाप्ता तैनात किया गया है। परिवहन व यातायात पुलिस की ओर से भी व्यवस्थाएं की गई है। चोटीला रपट, छीबागांव, पंचदेवल, राडबर, चोटीला गांव व पोसालिया राजमार्ग स्थित मुख्य बस स्टैण्ड पर यातायातकर्मी तैनात किए गए हैं।


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