
Sitapur Hatyakand
Sitapur Murder Case: सीतापुर में पल्हापुर गांव में एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव में पुलिस की गाड़ियों की आवाजाही ही सन्नाटे को चीर रही थी। जांच में जुटी पुलिस ने इस मामले में मृतक अनुराग सिंह के ताऊ, भाई अजीत, उसकी पत्नी और घर के दो नौकरों को भी हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है। इन लोगों से अलग- अलग पुलिस अधिकारियों ने लंबी पूछताछ की है।
गांव के लोग पुलिस की ओर से अनुराग को मानसिक बीमार और हत्या आरोपी बनाए जाने का विरोध करते दिखे। ग्रामीणों ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक स्व. वीरेंद्र सिंह के दो बेटे अनुराग सिंह और अजीत सिंह पिता की विरासत संभालते थे। अनुराग खेती में रुचि रखता था। अजीत सिंह प्राथमिक विद्यालय बरी, जगतपुर महमूदाबाद में सरकारी अध्यापक है।
अनुराग लीज पर लेकर लगभग 250 बीघा में खेती कर रहा था। अनुराग सिंह आधुनिक ढंग से भी सब्जियों की खेती कर चुका है। अनुराग के पिता वीरेंद्र और आरपी सिंह दो भाई थे। आरपी सिंह बड़े भाई और वीरेंद्र छोटे भाई थे। दोनों भाईयों ने एक साथ जमीन और घर खरीदे गए, जिसे आरपी सिंह ने चालाकी से अपने और अपनी पत्नी के नाम करते रहे। घर के बाहर आरपी सिंह अपने भाई वीरेंद्र का नाम भी नेम प्लेट पर डलवा देते थे ताकि किसी को शक न हो।
ग्रामीणों की मानें तो इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वीरेंद्र ने अपनी पुत्री निशा का विवाह कमलापुर से किया। इस दौरान उन्होंने लखनऊ के विकासनगर में खरीदा गया प्लॉट भी दहेज में दिया। उन्हें भरोसा था कि लखनऊ के खुर्रमनगर में खरीदे गए प्लॉट में अभी उन्हें आधा हिस्सा तो मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ विवाद बढ़ा तो आरपी सिंह और वीरेंद्र के बीच 2016-17 में खेत का बंटवारा हो गया।
इसी विवाद के बाद अनुराग नशा करने लगा था। पिता के साथ की गई इस धोखाधड़ी की वजह से अनुराग अपने ताऊ आरपी सिंह को अक्सर भला-बुरा कहा करता था। 2023 में वीरेंद्र की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बताते हैं कि अनुराग ने शराब का सेवन कम कर दिया था। पुलिस ग्रामीणों के बयान के आधार पर इस एंगल को भी जांच में शामिल कर रही है।
सीतापुर हत्याकांड में रविवार यानी 12 मई को अनुराग के ताऊ आरपी सिंह और उनके रिश्तेदारों के साथ ही अजीत और उसकी पत्नी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ग्रामीणों ने बताया कि दो-तीन साल से अनुराग के घर नौकरी कर रहे सर्वेश और वीरेश को भी पुलिस ने शनिवार रात ही हिरासत में ले लिया था।
सीओ महमूदाबाद दिनेश शुक्ला ने बताया, “सीतापुर हत्याकांड मामले के शीघ्र खुलासे के लिए सर्विलांस टीम, क्राइम ब्रांच, एसओजी को लगाया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला की मर्डर वेपन 315 बोर का अवैध असलहा और गोली भी देसी कारतूस थी। इस पर भी गौर कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।”
Published on:
13 May 2024 09:55 am

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