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पंचायत चुनाव में भी दिखी थी शिवपाल अखिलेश खेमे की अनबन

सूबे में जारी सियासी घमासान और सरकार में चल रहे हंगामे की स्टोरी भले ही कई डायरेक्टरों के द्धारा लिखी गयी हो, लेकिन इसमें मुख्य किरदारों की भूमिका दो ही लोग अदा कर रहे हैं

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Ruchi Sharma

Sep 17, 2016

shivpal akhilesh

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हिमांशु पुरी
सीतापुर. सूबे में जारी सियासी घमासान और सरकार में चल रहे हंगामे की स्टोरी भले ही कई डायरेक्टरों के द्धारा लिखी गयी हो, लेकिन इसमें मुख्य किरदारों की भूमिका दो ही लोग अदा कर रहे हैं। सीएम अखिलेश और चाचा शिवपाल महज सूबे की सियासत की अनबन के मुख्य किरदार नहीं है बल्कि पिछले कई मौकों पर दोनों के खेमों की अनबन को भी साफ तौर पर देखा गया है। सीतापुर जिला भी इस अनबन का बड़ा गवाह बना हुआ है।

दरअसल सीतापुर में कई माह पूर्व हुए जिला पंचायत के चुनाव में भी दोनों खेमों को काफी बड़े स्तर पर टकराते देखा गया था। अखिलेश खेमे में आने वाले सपा नेता शिव कुमार गुप्ता जो एक बार फिर से जिला पंचायत पर कब्ज़ा करना चाहते थे उन्होंने सपा सुप्रीमों के पारिवारिक लोगों से संपर्क करके पार्टी की तरफ अपनी पत्नी का टिकट फाइनल करा लिया। वहीं उस वक्त जिले के सबसे कद्दावर विधायक में शुमार और शिवपाल खेमे से जुड़े रामपाल यादव शिव कुमार के पैंतरे के आगे फेल दिखाई दिए। पार्टी ने उनको तभी से ही हासिये पर खड़ा कर दिया और साफ तौर पर जिला पंचायत चुनाव से दूरियां बनाने को कहा।

बावजूद इसके रामपाल यादव ने अपने पुत्र जितेंद्र यादव को जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर खड़ा किया। तमाम प्रशासनिक दबाव और पार्टी के सख्त रवैये के बावजूद रामपाल अपने निर्णय से पीछे नहीं हटे और जिला पंचायत के ज्यादातर सदस्यों की मजबूत घेराबंदी कर अपने पुत्र को विजयी बना ले गए। इस चुनाव में इस बात की चर्चा जोरों पर दिखी कि रामपाल यादव का पार्टी का निर्णय न मानना कहीं न कहीं उनकी कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव से खासा नजदीकी का असर ही है।

जिले के कई बड़े नेता और विधायकों का मिला था समर्थन

ये शिवपाल से खासा नजदीकी का ही बड़ा असर था कि सीतापुर में रामपाल यादव को लगभग सभी बड़े नेताओं और विधायकों का साथ मिला और उनके पुत्र को जीत का सेहरा मिला। हालांकि इसके बाद सीतापुर के बड़े नेताओं पर प्रदेश अधयक्ष अखिलेश की तरफ से बड़ी कार्यवाही देखने को तो मिली पर सवाल यही था कि पार्टी हाईकमान के निर्णय के बावजूद सीतापुर में किसके इशारे पर पार्टी दो धड़ों में बंटती जा रही है।

एक बार ही सख्त हुआ था जिले का प्रशासनिक अमला

सबसे ख़ास बात पर गौर करें तो पंचायत चुनाव में जिले का प्रशासनिक अमला विधायक रामपाल यादव के खिलाफ एक ही बार सख्त दिखा और कुछ ही घंटे में रामपाल के तेल डिपो और बालू खनन के काम पर कार्यवाही कर दी गयी लेकिन इसके बाद सब कुछ शांत ही दिखाई दिया और चुनाव संपन्न होने से निर्णय आने तक किसी प्रकार कोई कार्यवाही देखने को मिली। सूत्र बताते हैं कि जिला पंचायत के चुनाव में दो खण्डों में बंट चुकी पार्टी और रामपाल पर कार्यवाही को ठंडा करने में भी सूबे का दूसरा खेमा बड़ा रोल अदा कर रहा था।

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