सिवान। जमानत पर जेल से रिहा हुए राजद नेता और सीवान के पूर्व सांसद मो० शहाबुद्दीन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चंदाबाबू की ओर से उनकी जमानत रद्द कराने के लिए जाने-माने अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके साथ ही बिहार सरकार ने भी उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे डाली। दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।
प्रशांत भूषण ने सीवान में मारे गए तीन भाइयों के पिता चन्द्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदाबाबू की ओर से दायर याचिका का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश के समक्ष किया। कहा कि शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आने के बाद क्षेत्र में सनसनी और डर का माहौल बन गया है। उनके कुछ और तर्क रखने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश ने 19 सितंबर को सुनवाई की तिथि मुकर्रर कर दी। शहाबुद्दीन को 7 सितंबर को पटना हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जमानत दी थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2004 में दो भाइयों गिरीश-सतीश की हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को दिसंबर 2015 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। मामले में इकलौते गवाह मृतकों के भाई राजीव रौशन की भी 16 जून 2014 को हत्या कर दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट का जमानत देने का आदेश कानून का मजाक उड़ाना है, क्योंकि अभी तक गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं। इस तथ्य को भी अनदेखा कर दिया गया कि शहाबुद्दीन पर 13 मई को सीवान में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या का भी आरोप है। इसके अलावा 18 मई 2016 को सीवान जेल में छापे में उसके पास से 40 मोबाइल भी बरामद हुए थे।
उधर, राज्य सरकार की ओर से वकील गोपाल सिंह ने इस बाबत अर्जी दायर की। सरकार की ओर से कहा गया है कि हाईकोर्ट को जमानत देने से पहले निचली अदालत से केस की रिपोर्ट मांगनी चाहिए थी। वकील का कहना था कि पूर्व सांसद का आपराधिक इतिहास देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।
पीडि़त की याचिका में आधार बनाए गए कुछ मुख्य बिन्दु -
-शहाबुद्दीन कट्टर ए श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर है, जिसे सुधारा नहीं जा सकता।
-उस पर कुल 58 आपराधिक मामले दर्ज हैं,आठ में उन्हें दोषी करार दिया जा चुका है।
-नवंबर 2014 तक उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट के 27 और सेशन के 11 मुकदमे लंबित हैं।
-हत्या के दो मामलों में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
-अब भी हत्या, हत्या का प्रयास, हत्या के उद्देश्य से अपहरण, जबरन उगाही, चोरी और खतरनाक हथियारों के साथ दंगा करने के मामलों में सुनवाई चल रही है।