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अंधविश्वास की पराकाष्ठा: 13 वर्ष पूर्व पैदा हुए मृत शिशु की ‘आत्मा’ लेने अस्पताल पहुंचे परिजन

गीतों से गूंजता रहा प्रसव कक्ष

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नैनवां. विज्ञान के इस दौर में आज भी अंधविश्वास का स्थान कायम है। शुक्रवार को यहां सामुदायिक अस्पताल में अंधविश्वास की झलक देखने को मिली।

दुगारी गांव के ग्रामीण यहां के प्रसव कक्ष में 13 वर्ष पूर्व हुए मृत शिशु की आत्मा लेने आ पहुंचे। अस्पताल प्रशासन की समझाइश के बावजूद ग्रामीण दो घंटे तक आत्मा को वश में करने का टोटका पूरा कर ही लौटे।

ऐसे चला घटनाक्रम

दुगारी गांव के डेढ़ दर्जन महिला पुरुष सुबह सवा आठ बजे पूजन सामग्री लेकर अस्पताल के प्रसव कक्ष में घुस गए। उन्होंने चिकित्साकर्मियों को बताया कि दुगारी निवासी राजेश की पत्नी ने 13 वर्ष पूर्व यहां मृत शिशु को जन्म दिया था।

मृत शिशु की आत्मा परिजनों को दुख दे रही है, इसलिए उसे लेने आए हैं। इसी के साथ ग्रामीणों ने आत्मा को वश करने के लिए टोटका शुरू कर दिया। एक कोने में दीपक जलाकर महिलाएं गीत गाने लगी।

एक महिला के कहने पर ग्रामीण विभिन्न टोटके करते रहे। अस्पताल प्रभारी व चिकित्साकर्मियों इसे अंधविश्वास बताकर ग्रामीणों को समझाया, लेकिन उन्होंने टोटका जारी रखा।

महिलाओं के गीतों से प्रसव कक्ष गूंजता रहा। इस नजारे को देखने के लिए प्रसव कक्ष के बाहर तमाशबीनों की भीड़ लगी रही। करीब दो घंटे बाद आत्मा के वश में आने की बात कहकर ग्रामीण रवाना हो गए।

होती है परेशानी

जानकार लोगों ने बताया कि इस प्रकार की घटनाओं से चिकित्सालयों में अन्य लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। टोना टोटका करने वाले बूंदी जिला चिकित्सालय में भी ऐसा कई मर्तबा कर चुके हैं।

यह अंधविश्वास है। ग्रामीणों को समझाया भी, लेकिन नहीं माने। दो घंटे तक कई टोटके करते रहे। उसके बाद चले गए।

डॉ. समदरलाल मीणा, अस्पताल प्रभारी, नैनवां

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