
organ donation form bimla
चंडीगढ़। हरियाणा के सोनीपत जिले के अंतर्गत आते कस्बा गोहाना के एक परिवार ने अंगदान के प्रति अनूठी मिसाल कायम की है। यहां रहने वाले बंसल परिवार ने अंगदान के प्रति जागरूक होकर घर की एक सदस्या की मौत के बाद उनके अंग दान किए, जिससे राजधानी दिल्ली व बिहार के अलावा सेना में कार्यरत दो महिलाओं को जीवनदान मिला है। बंसल परिवार की इस पहलकदमी की सराहना करते हुए आज मैक्स अस्पताल शालीमार बाग के वरिष्ठ चिकित्सकों ने बंसल परिवार को सम्मानित किया।
इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में मूत्र रोग और गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ.वहीद जमान, नैफ्रोलॉजी के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ.दीपक जैन, नैफ्रोलॉजी के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ.अंकुर गुप्ता, मूत्र रोग एवं गुर्दा प्रत्यारोपण के कंसल्टेंट डॉ.विकास अग्रवाल ने बताया कि गोहाना की 57 वर्षीय मृतक अंगदाता स्वर्गीय श्रीमती बिमला बंसल तीव्र ब्रेन स्ट्रोक से पीडि़त महिला थी। महिला के परिवार के सदस्यों ने उदारता पूर्वक 10 जून, 2016 को 6 अंगों का दान किया। जिससे अन्य महिलाओं के जीवन में नई किरण पैदा हुई है।
पत्रकारों से बातचीत में डॉ.वहीद जमान ने कहा कि भारत में अंगों की अनुपलब्धता के कारण हर साल लगभग पांच लाख लोगों की जान चली जाती है। भारत की आबादी 1.2 अरब होने के बावजूद, यहां प्रति 10 लाख की आबादी (पीएमपी) पर मात्र 0.08 अंग दाता हैं। उन्होंने कहा कि उत्साहित लोगों को सामने आकर मानवता के नाते अंग दान करने के लिए कदम उठाना चाहिए। इस निराशाजनक परिदृश्य में स्वर्गीय बिमला बंसल के पति राम प्रसाद बंसल और दामाद विनय गर्ग ने 10 जून को साहसिक कदम उठाया।
उन्होंने बताया कि रोगी को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद स्वर्गीय बिमला बंसल के परिवार ने शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में न्यूरोलॉजी में कंसल्टेंट डॉ. मनोज खनाल से संपर्क किया और अंगों को दान करने की इच्छा व्यक्त की। नेफ्रोलॉजी के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ.दीपक जैन ने कहा कि जीवित दाता से गुर्दा प्रत्यारोपण के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है क्योंकि भारत में 95 प्रतिशत गुर्दा प्रत्यारोपण जीवित दाता से ही किये जाते हैं। विश्व अंगदान दिवस 2016 का मिशन जीवित और मृतक दोनों दाता कार्यक्रम के लिए और अधिक जागरूकता पैदा करना है।
अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ.अंकुर गुप्ता के अनुसार बंसल परिवार द्वारा लिया गया निर्णय सही अर्थों में इस बात पर पुन: जोर देता है कि अंगदान किस प्रकार मानवता का एक सच्चा संकेत है।
भारत में अंग दान के बारे में तथ्य
--देश में अंगों की अनुपलब्धता के कारण सालाना 5 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
--दाताओं की कमी के कारण भारत में हर साल गुर्दे की बीमारी से 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
--दान दिये गये हृदय की कमी के कारण हर साल दिल की बीमारी से 50 हजार लोगों की मौत हो जाती है।
--कार्निया अंधापन से 10 लाख लोग पीडि़त हैं और प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं।
--आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में करीब डेढ़ लाख लोग गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे हैं।
--गुर्दे की जरूरत वाले 30 में से एक रोगी को एक गुर्दा प्रत्यारोपित हो पाता है।
Published on:
13 Aug 2016 01:33 pm
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