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बीकानेर में संरक्षित है 22 फीट लंबी पुरन्दर की संधि

रियासत काल में 360 साल पहले छत्रपति ​शिवाजी महाराज और जयपुर राजा जयसिंह प्रथम के बीच पुरन्दर की सं​धि हुई थी। पूना ​िस्थत पुरन्दर किले में हुई यह सं​धि पुरन्दर सं​धि के नाम से प्रसिद्ध है। बीकानेर अ​भिलेखागार में पुरन्दर सं​धि की प्रति उपलब्ध है। यह सं​धि 22 फीट लंबी है। इस सं​धि पर 99 पं​क्तियां उल्ले​खित है। यह सं​धि फारसी भाषा में है।

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बीकानेर. रियासत काल में पूना स्थित पुरन्दर किले में 360 साल पहले हुई संधि इतिहास के पन्नो में दर्ज है। इसे पुरन्दर की संधि भी कहा जाता है। यह संधि 11 जून 1665 के दिन छत्रपति शिवाजी महाराज और जयपुर राजा जयसिंह प्रथम के बीच हुई थी। राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर में इस संधि की प्रति आज भी संरक्षित है। पुरन्दर की संधि पर उल्लेखित वाक्य और बातें उस दौर की राजनीति, रियासतों के माहौल का वर्णन करती है।

22 फीट लंबी तथा इसमें है 99 पंक्तियां

अभिलेखागार विभाग के निदेशक डॉ. नितिन गोयल के अनुसार अभिलेखागार में पुरन्दर की संधि की प्रति संरक्षित है। पुरन्दर की संधि छत्रपति शिवाजी महाराज और जयपुर राजा जयसिंह प्रथम के बीच हुई थी। संधि का दस्तावेज लगभग 22 फीट लंबा है व इसमें 99 पंक्तियां उल्लेखित है। निदेशक के अनुसार पुरन्दर की संधि फारसी भाषा में लिखी हुई है, जो दक्खनी हस्त निर्मित कागज पर है।

आकर्षण का केन्द्र

निदेशक डॉ. नितिन गोयल के अनुसार पुरन्दर की संधि ऐतिहासिक है। अभिलेखागार में आने वाले दर्शक इस संधि को बड़ी उत्सुकता से निहारते हैं व इस संधि में उल्लेखित बातों को जानते भी हैं। ऐतिहासिक होने के कारण पुरन्दर की संधि आकर्षण का केन्द्र भी बनी रहती है।