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गौ-मूत्र का करें छिड़काव…कीट-रोग से होगा बचाव और मिलेगी अच्छी पैदावार

छोटा नागपुर नाम से प्रसिद्ध सुनेल (झालावाड़) क्षेत्र के अधिकतर गंावों के बागानों में इन दिनों संतरे ही संतरे नजर आ रहे हैं। यहां के संतरों की मांग देशभर में होने के साथ ही विदेश में भी बनी रहती है। बड़े पैमाने पर खेती करने वाले सेमला गंाव निवासी गुलाबचंद और उनकी पत्नी आशाबाई ने बताया, यूपी, हरियाणा, पंजाब, बिहार, दिल्ली, अलीगढ़ सहित अन्य राज्यों के बड़े व्यापारी सीधे खेतों से ही संतरे खरीद कर लोडिंग वाहनों में भरकर ले जाते हैं।
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Kanchan Arora

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Mar 23, 2024

गौ-मूत्र का करें छिड़काव...कीट-रोग से होगा बचाव और मिलेगी अच्छी पैदावार

गौ-मूत्र का करें छिड़काव...कीट-रोग से होगा बचाव और मिलेगी अच्छी पैदावार

पांच साल में आने लगते हैं फल
किसानों के अनुसार, यहां की मिट्टी और जलवायु संतरे की खेती के लिए उपयोगी है। इसलिए इनमेंं एक अलग मिठास भी मिलती है। पौधा लगाने के बाद पांच साल में पेड़ बन जाता है और फल आने लगते हैं। प्रति पेड़ ढाई से सात क्विंटल तक उत्पादन होता है। 20 किलो के एक कैरेट के पांच सौ रुपए तक मिल जाते हैं।
20 बीघा में लगाए 1700 पौधे
दम्पत्ति ने बताया, पौध लगाने से पहले खेत को अच्छे से तैयार करना जरूरी होता है। उन्होंने 20 बीघा भूमि पर संतरों के 1700 पौधे लगाए हुए हैं। समय-समय पर गौमूत्र का छिड़काव करते हैं। इससे कीटों-रोगों से बचाव हो जाता है। पैदावार भी अच्छी होती है। पर्याप्त मात्रा में खाद व उर्वरकों का उपयोग आवश्यक होता है। मौसम के हिसाब से सिंचाई करनी होती है। एक बार लगाए गए पौधे से कई सालों तक फल प्राप्त कर सकते हैं।
यहां के संतरे नागपुरी संतरों के नाम से भी जाने जाते हैं, क्यूंकि संतरेे के बगीचे तैयार करने के लिए किसान पौधे नागपुर से ही लाते हैं। वहां के पौधों को यहां की जमीन खूब रास आ रही है। इसके चलते उत्पादन भी बहुतायत में होता है।

- कृषि अधिकारी हरिप्रसाद दानी और उद्यान विभाग के सहायक निदेशक कैलाशचंद शर्मा

- मेघा जैन