
इलाहाबाद यमुना पुल
इलाहाबाद. ब्रिटिश हुकूमत में यमुना नदी पर बनाए गए करीब 153 साल पुराने रेल ओवरब्रिज की निगरानी अब ड्रोन से की जाएगी। इलाहाबाद और नैनी को जोड़ने वाले इस पुल की निगरानी रेलवे करेगा। उत्तर मध्य रेलवे ने यमुना ब्रिज की ड्रोन से वीडियो रिकार्डिंग करा कर रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। रेलवे बोर्ड की ओर से यह कदम सुरक्षा को ध्यान में रख उठाया गया है।
दरअसल रेलवे बोर्ड ने आए दिन हो रहे रेल हादसों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ट्रैक और ट्रेनों की निगरानी ड्रोन से कराने का निर्णय लिया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद के पुराने यमुना पुल और आगरा मंडल के आगरा-पलवल रेल खंड को शामिल किया गया है। इसी के तहत उत्तर मध्य रेलवे ने इलाहाबाद और नैनी को जोड़ने वाले पुराने यमुना ब्रिज की ड्रोन से वीडियो रिकार्डिंग करवायी है।
अंग्रेजों के जमाने में बने इस यमुना ब्रिज की रिकार्डिंग इस प्रकार से करायी गई है जो कि इंसान के लिए संभव ही ना हो। इसी प्रकार से आगरा-पलवल रेल खंड की भी वीडियो रिकार्डिंग करा कर रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी है। रेलवे बोर्ड ने भेजी गई दोनों वीडियो रिकार्डिंग की सराहना की है। इसके साथ ही अब रेलवे ड्रोन कैमरे से ही रेलवे ट्रैक और ट्रेनों की निगरानी करेगा।
ऐसे में अगर आपको रेलवे ट्रैक और ट्रेन के आगे कहीं ड्रोन कैमरा उड़ते दिख जाए तो डरे चौकने की जरूरत नहीं है। क्योंकि रेलवे यह सुरक्षा को ध्यान में रख शुरू करने जा रहा है। इसके लिए रेलवे ने सभी जोन को निर्देश जारी कर दिया है।
1865 में अंग्रेजों ने बनाया था यह यमुना ब्रिज
ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजों ने अपने व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यमुना नदी पर इस ब्रिज का निर्माण किया था। सन 1855 में इस पुल के लोकेशन और डिजाइन तैयार किया गया। 1859 में पुल बनाने का कार्य शुरू हुआ। करीब 3150 फीट लंबे इस रेलवे यमुना ब्रिज पर 15 अगस्त 1865 से आवागमन शुरू हुआ।
Published on:
12 Jan 2018 01:46 pm
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