सहायक अभियंता हिमांशु भट्ट ने बताया कि डायलाब सौन्दर्यीकरण के अन्तर्गत घाट का पुनरुद्धार किया जाएगा। करीब पांच सौ मीटर तक की पाल का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। मंदिर के पास से इसके अंतिम सिरे पर पाथ-वे पर इंटरलॉकिंग की जाएगी। तालाब की पूरी दीवार पर पैरापेट वॉल कार्य किया जाएगा। साथ ही स्ल्यूस गेट की मरम्मत का कार्य भी होना है।
प्रमुख आस्था स्थल
जयपुर मार्ग पर डायलाब तालाब हिन्दू व मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए प्रमुख केंद्र हैं। हिन्दू धर्म के लोगों के लिए यह तालाब गणेश महोत्सव के उपरांत गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का प्रमुख केंद्र है। वहीं यहां पर विभिन्न पर्व पर स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है। दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय की ओर से भी मोहर्रम के अन्तर्गत निकाले जाने वाले ताजियों को यहीं पर ठंडा किया जाता है। डायलाब के किनारे हरिहर मारुति धाम हनुमान मंदिर है, जहां हनुमान जयंती पर वार्षिक मेला भरता है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं।
लंबे समय से दुर्दशा
डायलाब तालाब किसी समय शहर के सुंदर स्थानों में सम्मिलित था। मंदिर आने वाले श्रद्धालु यहां अथाह जलराशि में कमल दल खिलते देख प्रफुल्लित होते थे। लोग इसके घाट पर बैठकर प्रकृति के संग समय व्यतीत करते थे। तालाब का समुचित संरक्षण नहीं होने से धीरे-धीरे यह दुर्दशा का शिकार हो गया। जलकुंभी पसरने से इसका सौन्दर्य समाप्त हो गया। जलकुंभी निकालने के लिए लाखों रुपए व्यय हुए, किंतु इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अब यहां सौन्दर्यीकरण कार्य होने से इसके प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने की उम्मीद है।
इनका कहना है
नगरपरिषद की पहल पर जल संसाधन विभाग की ओर से तीन करोड़ 40 लाख रुपए की स्वीकृति जारी की गई। स्वीकृति के बाद यहां होने वाले कार्य की प्रस्तावित लागत का आकलन किया गया, जो करीब दो करोड़ 99 लाख रुपए का रहा। उन्होंने बताया कि विभागीय स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसमें कार्यादेश राशि दो करोड़ 55 लाख का दिया गया है।
अनिल गुप्ता,
अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग, बांसवाड़ा