25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डूंगरपुर में वनप्रेमियों ने खोजे छह और दुर्लभ पीले पलाश के वृक्ष

रंग लाई मुहिम, वनप्रेमियों में खुशी की लहर, जिले में अब तक दस पीले पलाश के पेड़ आए नजर, रंग ला रहे हैं पत्रिका के प्रयास

2 min read
Google source verification
डूंगरपुर में वनप्रेमियों ने खोजे छह और दुर्लभ पीले पलाश के वृक्ष

डूंगरपुर में वनप्रेमियों ने खोजे छह और दुर्लभ पीले पलाश के वृक्ष

डूंगरपुर. राजस्थान पत्रिका की ओर से जिले सहित प्रदेश के अतिदुर्लभ पीले पलाश (ब्यूटिका मोनास्पर्मा ल्यूटिका) के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर शुरू की गई समाचार श्रृंखला के सार्थक प्रयास रंग नजर आते जा रहे हैं। अब तक जिले में केवल चार ही पीले पलाश सामने आए थे। लेकिन, पत्रिका की ओर से पीले पलाश के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर चलाई समाचार श्रृंखला के बाद वनप्रेमियों दूरस्थ वन क्षेत्रों तक बीहड़ों में अवस्थित पीले पलाश के दुर्लभ वृक्षों को खोजते हुए उन्हें संरक्षित एवं संवर्धित करने का संकल्प लिया है।

पहले दिखे थे चार, अब हो गए दस
जिले में वर्षों से चार ही दुर्लभ पीले पलाश के होने का अनुमान था। इनमें एक वृक्ष डूंगरपुर-सागवाड़ा मार्ग पर शंकर घाटी के कुछ आगे सड़क के एक छोर पर हैं। शेष तीन वृक्ष डूंगरपुर से माथुगामड़ा मार्ग पर रेलड़ा राजकीय विद्यालय के पास, माण्डवा माध्यमिक विद्यालय के पास तथा एक अन्य माण्डवा खापरड़ा गांव हैं। लेकिन, डूंगरपुर-बांसवाड़ा मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 927 ए पर स्वरूपगंज-रतलाम सड़क विस्तार के कार्य के चलते शंकर घाटी के किनारे स्थित पीले पलाश के वृक्ष के कटने की संभावनाओं को देख पत्रिका ने समाचार श्रृंखला चलाई। इसके बाद वनप्रेमी, जिला प्रशासन और वन विभाग सजग हुआ और वृक्ष बचाने के लिए जुटे। साथ ही पत्रिका में पीले पलाश के वृक्ष की आध्यात्मिक, आयुर्वेद तथा पर्यावरण लिहाज से समृद्धता को लेकर लगातार समाचार श्रृंखला प्रकाशित किए जाने के बाद वनप्रेमियों ने दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तथा बीहड़ों में भी छह और पीले पलाश के वृक्ष ढूंढ लिए हैं।

अभियान का व्यापक असर
पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक वीरेंद्र सिंह बेडसा ने बताया कि जिले में दुर्लभ पीले पलाश सहित स्थानीय एवं दुर्लभ प्रजातियों के वृक्षों को बचाने व इनके बीज संग्रहित कर वन विभाग को उपलब्ध कराने की मुहिम में जिले के प्रकति प्रेमी उत्साह दिखाते हुए अभियान पूर्वक कार्य कर रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। राजस्थान पत्रिका में सरकण शंकरघाटी के दुर्लभ पीले पलाश को बचाने की मुहिम के समाचारों से जिले में अन्य स्थानों पर भी पीले पलाश को ढूंढने और उनके संरक्षण की दिशा में प्रकृति प्रेमी उत्साह दिखा रहे हैं।

बहुत बड़ी बात है...
सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक डा. सतीशकुमार शर्मा ने बताया कि डूंगरपुर में अब तक चार पीले पलाश के वृक्ष होने की ही जानकारी सामने आई थी। लेकिन, इनकी संख्या यदि दस हैं, तो यह बहुत बड़ी बात है। जिले और खासकर आसपास के लोगों को चाहिए कि वह इन दसों वृक्षों की अच्छी सार-संभाल करें। साथ ही उनके सीड्स संग्रहण कर इस वृक्ष की नई पौध तैयार करें। यह वृक्ष इको टूरिज्म को बढ़ाने में बहुत अधिक मददगार बनेगा।

छह नए पीले पलाश के वृक्ष यहां मिले...
1. बीड़ाफला बलवाड़ा में स्थित पीले पलाश को राउप्रावि बीड़ाफला के अध्यापक दिनेश प्रजापत ने देखकर पुष्टि की है।
----------------
2. गेहूंवाड़ा के डूंगरे के पीछे स्थित बीड़ में राउमावि पुनाली के शिक्षक अरविंदसिंह शक्तावत ने देखा है।
----------------
3. पुनाली में राजकीय बालिका छात्रावास मार्ग पर पीला पलाश है। इसे राउमावि पुनाली के प्रयोगशाला सहायक अरुणकुमार परमार ने देखा है।
----------------
4. गेहूंवाड़ा में खोतला बीड़ में वंदनसिंह शक्तावत ने पीला पलाश का वृक्ष होना बताया है।
----------------
5. गेहूंवाड़ा में खोतला बीड़ में ही एक अन्य पीले पलाश को भैरवसिंह शक्तावत ने देख कर पुष्टि की है।
----------------
6. ग्राम पंचायत चकमहुड़ी के धोलीगार वाला एनीकट के पास मणिलाल नाथ रोत के बीड़ में पीला पलाश के वृ़क्ष का फोटो लेकर रामावि चकमहुड़ी की कक्षा सात की छात्रा प्रगति खराड़ी ने पुष्टि करवाई है।