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प्रसूताओं की किडनी फेल होना चौंकाने वाला मामला, जांच रिपोर्ट से ही मौत के कारणों का पता चलेगा

प्रसूताओं की मौत के मामले की हकीकत जानने के लिए गुरुवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर कोटा पहुंचे। उन्होंने आते ही मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक भवन में चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली

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Health Minister in kota

Health Minister in kota

कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेके लोन चिकित्सालय में सिजेरियन डिलीवरी के बाद चार प्रसूताओं की मौत के मामले की हकीकत जानने के लिए गुरुवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर कोटा पहुंचे। उन्होंने आते ही मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक भवन में चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली। वहां डाॅक्टरों से इस संबंध में बिन्दुवार बात की। इसके बाद अस्पतालों का दौरा कर व्यवस्थाएं जांची।

इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में चिकित्सा मंत्री ने प्रसूताओं की मौत को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि दवाओं से लेकर सर्जिकल आइटम व उपकरणों की जांच चल रही है। जांच पूरी होने पर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृति न हो, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

मंत्री ने कहा कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होना चौंकाने वाला है। इसके बारे में एम्स के चिकित्सकों की टीम जांच करेगी। इन्फेक्शन के मामले में तेजी से किडनी फेल होना चौंकाने वाला है। संभवतया: सीधे खून में कोई संक्रमण पहुंचा, जिससे इतनी जल्दी असर हुआ है। यह सब रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा। रिपोर्ट 8-10 दिन में आ जाएगी।--

रिपोर्ट के बाद लगेगा कारणों का पता

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी प्रसूताओं की मौत के कारणों के बारे में फाइनल जांच रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कारणों का पता लग सकेगा। कुछ सैम्पल कोलकाता की लेब में भेजे हैं, वहां जांच के बाद इसका कारण स्पष्ट हो सकेगा।

हर वर्ष 18 हजार प्रसव, मातृ मृत्यु दर मात्र 0.2 प्रतिशत

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कोटा के जेके लोन एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल दोनों ही प्रतिष्ठित अस्पताल हैं और यहां हर साल लगभग 14 लाख रोगी ओपीडी में उपचार प्राप्त करते हैं, करीब डेढ़ लाख लोग आइपीडी में उपचार लेते हैं। साथ ही, करीब 18 हजार प्रसव हर वर्ष इन दोनों अस्पतालों में होते हैं, जिनमें से करीब 10 हजार प्रसव सिजेरियन होते हैं, लेकिन इलाज की गुणवत्ता और बेहतर प्रबंधन के चलते यहां मातृ मृत्यु दर 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक रहती है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

इसी प्रकार आरएमएससीएल से आपूर्तित दवाओं की विभिन्न स्तरों पर क्वालिटी टेस्टिंग की जाती है और एक ही प्रकार की दवाएं प्रदेशभर के विभिन्न अस्पतालों में आपूर्ति की जाती हैं। ऐसे में इन दोनों अस्पतालों में एक साथ कई प्रसूताओं का स्वास्थ्य बिगड़ना चिंता का कारण है और गहन जांच का विषय है। हम इसकी तह तक जाएंगे।