उन्हें लोग प्यार से बालासाहेब भी कहते थे। वे मराठी में सामना नामक अखबार निकालते थे। इस अखबार में उन्होंने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पूर्व अपने सम्पादकीय में लिखा था। आजकल मेरी हालत चिंताजनक है किंतु मेरे देश की हालत मुझसे अधिक चिंताजनक है, ऐसे में भला मैं चुप कैसे बैठ सकता हूं।