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Indian Air Force : GSAT-7C सैटेलाइट से शत्रु का शिकार करेगी वायुसेना

Indian Air Force :भारतीय वायुसेना के GSAT-7C उपग्रह के लिए रक्षा अधिग्रहण परीषद ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 2 हजार 2 सौ 36 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे पहले भारतीय नौ सेना के पास GSAT-7 उपग्रह है। इसके माध्यम से वह समुद्र पर नजर रखे हुए है। इसे रूक्मिणी की नाम से भी जाना जाता है। वहीं GSAT-7A को भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना द्वारा प्रयोग किया जाता है।

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जयपुर

Indian Air Force :भारतीय वायुसेना के GSAT-7C उपग्रह के लिए रक्षा अधिग्रहण परीषद ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 2 हजार 2 सौ 36 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे पहले भारतीय नौ सेना के पास GSAT-7 उपग्रह है। इसके माध्यम से वह समुद्र पर नजर रखे हुए है। इसे रूक्मिणी की नाम से भी जाना जाता है। वहीं GSAT-7A को भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना द्वारा प्रयोग किया जाता है। भारतीय वायु सेना को इस उपग्रह के मिलने से कई गुना ताकत बढ़ जाएगी बल्कि दुश्मन की निगरानी क्षमता में बेहद इजाफा होगा। भारतीय वायु सेना काफी दिनों से अपना संचार उपग्रह मांग रही थी।

यूएवी के लिए नहीं होगी जमीनी संपर्क की जरूरत
भारतीय वायुसेना को इस उपग्रह के मिलने के बाद ड्रोन सीधे उपग्रह से संचालित होंगे। इसके माध्यम से वायु सेना के रडार स्टेशन, वायुअडडे, अवॉक्स आपस में जुड़ जाएंगे। इससे लड़ने की क्षमता में कई गुना इजाफा होगा। युद्धक विमान और अवाक्स के बीच आसानी से बातचीत हो पाएगी। अमरीका से खरीदे जा रहे सैन्य ड्रोन प्रीडेटर-बी या सी गार्डियन ड्रोन का संचालन बेहद ही मारक हो जाएगा।


सर्जिकल स्ट्राइक में सैटेलाइट आई थी काम

भारत के पास अभी करीब 13 सैन्य उपग्रह हैं। इसमें से ज्यादातर रिमोट-सेंसिंग उपग्रह हैं जिनमें कार्टोसैट सीरीज और रीसैट उपग्रह शामिल हैं। ये चित्र लेने में मददगार होते हैं। इसमें से कुछ को धरती की भू-स्थैतिक कक्षा (जियो ऑरबिट) में भी स्थापित किया जाता है। इनका इस्तेमाल निगरानी, नेविगेशन और बातचीत के लिए किया जाता है। ये भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी काफी मदद मिली थी।

दुनिया में हैं 320 सैन्य उपग्रह

इस समय दुनिया में 320 सैन्य उपग्रह चक्कर काट रहे हैं। इसमें से आधे उपग्रह अमरीका के हैं। इसके बाद रूस और चीन का नंबर है। चीन ने कुछ सालों में काफी बढ़त बनाई है। जनवरी 2017 में धरती की निचली कक्षा में घूमने वाले उपग्रह के लिए ASAT (एंटी सैटलाइट) वेपन का टेस्ट भी किया था।