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दिल्ली की बाहुबली वुमन बाउंसर हैं ये बहनें, इनके रहते किसी की क्या मजाल जो किसी लड़की से बेअदबी कर सके!

मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली मेहरूनिसा और तरन्नुम शौकत अली दोनों क्लब में होने वाली लड़ाई को खत्म कराने से लेकर महिला ग्राहकों पर नजर रखने तक का काम करती हैं...

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Rahul Mishra

Jul 19, 2017

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delhi bahubali female bouncer sisters mehrunnisa and tarannum,

नई दिल्ली: ये कहानी 28 साल की मेहरूनिसा और उनकी बहन तरन्नुम शौकत अली की है। मेहरुनिशा शौकत अली और तरन्नुम शौकत अली जिन्हें आप ग्राहकों या सहकर्मियों के साथ बात करते या हंसते हुए देखेंगे तो इस बात का अंदाजा नहीं लगा पाएंगे कि इस मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक कड़क मिजाज बाउंसर छिपा हुआ है। मेहरुन निशा के परिवार में कुल चार भाई और उनके अलावा दो बहनें हैं। उनकी एक और बहन भी बाउंसर का काम करती हैं।

अगर आप बाउंसर बनने को सिर्फ मर्दों का काम समझते आए हैं तो आपको दिल्ली को दो बहनों से मिलना चाहिए। मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली मेहरूनिसा और तरन्नुम शौकत अली दोनों क्लब में होने वाली लड़ाई को खत्म कराने से लेकर महिला ग्राहकों पर नजर रखने तक का काम करती हैं।
इरादों में मजबूती
28 साल की मेहरुन निशा यूपी के सहारनपुर जिले से ताल्लुक रखती हैं। महिलाओं को जहां एक तरफ घर की चहारदीवारियों की कैद में रहना पड़ता है, वहीं मेहरुन निशा का यह काम महिलाओं के ताकत और हिम्मत की एक जीती जागती मिसाल है।
जब काम पर होती हैं...
मेहरूनिसा पिछले एक दशक से बाउंसर के रूप में काम कर रही हैं। पिछले तीन साल से तो वो नई दिल्ली के 'द सोशल' में 10 घंटे की नाइट शिफ्ट कर रही हैं। 'द सोशल' दिन में एक रेस्टोरेंट के रूप में होता है लेकिन रात में क्लब में बदल जाता है।
काम का अनुभव
काली वर्दी में डांस फ्लोर के नजदीक अपने मजबूत हाथों को मोड़कर बड़ी-बड़ी आंखों से जब वे संगीत की धुन पर थिरकते जोड़ों को घुरती हैं तो किसी की क्या मजाल कि कोई किसी से भूलकर भी बेअदबी करे। महरून्निसा शौकतअली बीते एक दशक से बाउंसर का काम कर रही हैं। पिछले 3 महीने से तो वे रात को 10 घंटे की शिफ्ट पर रहती हैं। रेस्टोरेंट वाले उन्हें झगड़े निपटाने वाली बाहुबली के रूप में देखते हैं।
'निडर और दृढ़ संकल्प'
'द सोशल' के मालिक रियाज अमलानी ने कहा, "हमने महिला ग्राहकों की सुरक्षा के लिए महिला बाउंसर रखने का फैसला किया था। इस काम के लिए हमें मेहरूनिसा एक दम सही नजर आईं।" रियाज ने बताया कि मेहरूनिसा ने शराब के नशे में लड़ने वाले कई लोगों की सबक सिखाया है।
रुढ़िवाद को तोड़ने वाली
अपने संघर्ष की कहानी बयां करते हुए वे बताती हैं कि यह काम पाना उनके लिए आसान नहीं था। बातचीत के दौरान मेहरुन ने बताया कि उनका वजन 80 किलो हुआ करता था, जिसे कम करने के लिए उन्होंने एनसीसी ज्वाइन किया। वो चाहती थीं कि उन्हें पुलिस में नौकरी मिले. लेकिन उनके पिता शौकत अली को यह पसंद नहीं था।
कस्टमर्स को है भरोसा
महरून्निसा को अपने काम से कोई शिकायत नहीं, सिर्फ इतना मलाल होता है कि ईद के पाक महीने में उसे रात की शिफ्ट करनी पड़ती है और परिवार की मायूसी उससे देखते नहीं बनती। वे कहती हैं, ' क्या फर्क पड़ता है। अम्मी और अब्बा को मुझपर यकीन तो है और मैं कुछ गलत भी तो नहीं कर रही।' महरून्निसा की राह पर उसकी छोटी बहन तरन्नुम (27) भी चल पड़ी हैं।

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