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जापान में डिमेंशिया पीड़ितों के लापता होने की तादाद एक दशक में हुई दोगुनी

जापान में वृद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि ऐसे लोगों की संख्या कम ही है, जो उनकी देखभाल कर सकें। पिछले साल इस देश में डिमेंशिया से पीड़ित 18,709 लोग लापता हुए। यह आंकड़ा 2021 की तुलना में 6.1 प्रतिशत अधिक और 2012 में दर्ज किए गए 9,607 मामलों की तुलना में लगभग दोगुना है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Jun 24, 2023

जापान में डिमेंशिया पीड़ितों के लापता होने की तादाद एक दशक में हुई दोगुनी

जापान में डिमेंशिया पीड़ितों के लापता होने की तादाद एक दशक में हुई दोगुनी

टोक्यो। जापान की राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार इस देश में 2012 से 2022 के बीच लापता हुए, डिमेंशिया (याददाश्त का कमजोर होना ) से पीड़ितों की संख्या दोगुनी हो गई है। यह बीमारी खासकर बुजुर्गों को होती है। आंकड़ा इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि जापान में वृद्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि ऐसे लोगों की संख्या कम ही है, जो उनकी देखभाल कर सकें। पिछले साल इस देश में डिमेंशिया से पीड़ित 18,709 लोग लापता हुए। यह आंकड़ा 2021 की तुलना में 6.1 प्रतिशत अधिक और 2012 में दर्ज किए गए 9,607 मामलों की तुलना में लगभग दोगुना है। जापान में पिछले 10 सालों से यह डेटा एकत्रित किया जा रहा है।

पांच में से एक बुजुर्ग को यह समस्या होने की आशंका:

लापता बुजुर्गों की संख्या सबसे ज्यादा जापान के ह्योगो प्रांत, ओसाका और सैतामा में दर्ज की गई। वर्तमान में जापान के 60 लाख से अधिक लोगों को यह समस्या है। अनुमान है कि 2025 तक 70 लाख लोगों या 65 वर्ष से अधिक उम्र के पांच में से एक बुजुर्ग इस रोग से प्रभावित होंगे। वैसे जापान में 2022 में कुल लापता व्यक्तियों की संख्या 84,910 तक पहुंच गई। इनमें युवाओं और किशोरों के बाद बुजुर्गों की संख्या सर्वाधिक थी। लापता लोगों में 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्ग 13,749 थे। जबकि 70 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धों की तादाद 10,779 थी।

तकनीक की मदद से तलाश रहे संकट का समाधान:

जापान में इन मामलों में वृद्धि की वजह से स्थानीय नगर पालिकाओं और संगठनों ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए योजनाएं तैयार करनी शुरू कर दी हैं। कुछ संगठन, दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर स्मार्टफोन ऐप की मदद से लापता लोगों का पता लगाने के प्रयास कर रहे हैं। जबकि कई शहरों में डिमेंशिया से प्रभावित लोगों की निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग सिस्टम लगाए हैं। लापता बुजुर्गों की तलाश करने वाले परिवारों के लिए एक विशेष वेबसाइट भी बनाई गई है। परिवारों को डिमेंशिया पीड़ित बुजुर्गों को जीपीएस डिवाइसेस देने के लिए कहा गया है, जिन्हें प्रशासन निशुल्क उपलब्ध कराता है। इसके अलावा बुजुर्गों के कपड़ों पर ऐसे क्यूआर कोड पैच भी लगाए जा रहे हैं, जिन्हें स्कैन कर उनसे जुड़ी जानकारी मिल पाए और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाया जा सके।