
वैश्विक स्तर पर 40% मरीजों को डायबिटीज का पता ही नहीं चल पाता
लंदन। वैश्विक स्तर पर डायबिटीज से पीड़ित लगभग 40 फीसदी मरीजों को अपनी बीमारी का पता ही नहीं चल पाता। रिपोर्ट '2023 डायबिटीज ग्लोबल इंडस्ट्री ओवरव्यू' के अनुसार ऐसे अधिकांश लोग अफ्रीका (60%) में रहते हैं, इसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया (57%) और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र (56%) का स्थान आता है। दुनियाभर में 530 से अधिक कंपनियां डायबिटीज के इलाज की विशेषज्ञता रखती हैं, लेकिन केवल 33 कंपनियां ही अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में स्थित हैं। यह अपनी तरह का अब तक का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है, जो डायबिटीज और इसके संबंध में मार्केट की स्थिति को बताता है।
डायग्रोस के बाद भी आधों को नहीं मिलता इलाज:
हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और डायग्रोस्टिक उपकरणों की कमी सहित स्वास्थ्य देखभाल का सीमित बुनियादी ढांचा डायबिटीज के शुरुआती उपचार में बाधक बन सकता है। जिन लोगों में इस रोग का पता चल भी जाता है, उनमें से भी आधों को इलाज ही नहीं मिल पाता। इस स्थिति वाले चार में से तीन लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, जहां लोगों की हर समय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं है। डायबिटीज संबंधी सेवाएं प्रदान करने वाली अधिकांश (72%) कंपनियां अमरीका में स्थित हैं। इसके बाद ब्रिटेन, भारत और कनाडा का स्थान है, जो कुल मिलाकर दुनियाभर की डायबिटीज संबंधी नौ फीसदी कंपनियों की मेजबानी करते हैं।
उन्नत इंसुलिन थेरेपी अमरीका और कनाडा में:
विश्व में 53.7 करोड़ से अधिक लोग टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं। इलाज पर 80 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने के बावजूद 2021 में दुनियाभर में लगभग 70 लाख मौतें डायबिटीज के कारण हुईं। आज भी डायबिटीज के उपचार में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित किया जाता है, जिसके लिए सबसे आम दवा इंसुलिन है। लेकिन उन्नत इंसुलिन थेरेपी (तेजी से काम करने वाली, लंबे समय तक काम करने वाली और कम असर करने वाली) और साथ ही गैर-इंसुलिन दवा का उपयोग अमरीका और कनाडा में ज्यादा होता है। जबकि अन्य देशों जैसे चीन, भारत और ब्राजील में एंटी-डायबिटीज दवाओं का उत्पादन सर्वाधिक होता है।
अधिकांश शोध अमरीका और यूरोप तक सीमित:
भविष्य में अन्य प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए डायबिटीज पर नियंत्रण जरूरी है। विश्व में डायबिटीज के संबंध में 2100 से अधिक सक्रिय परीक्षण चल रहे हैं। उत्तरी अमरीका इसका सबसे बड़ा शोध केंद्र है। यहां 53 फीसदी से ज्यादा परीक्षण हो रहे है। 24 प्रतिशत से अधिक यूरोप की ओर से प्रायोजित हैं। अन्य वैश्विक क्षेत्रों में कुल मिलाकर 10 फीसदी से कम परीक्षण होते हैं। चिकित्सा जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) लोकप्रिय हो रहा है लेकिन केवल दो फीसदी कंपनियां ही डायबिटीज के डायग्रोस्टिक्स के लिए एआइ विकसित कर रही हैं। शोध का निष्कर्ष इलाज में असमानताओं, विशेष रूप से विकासशील देशों में देखभाल तक पहुंच में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।
दुनियाभर में डायबिटीज के मामले
Published on:
08 Oct 2023 12:41 pm

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