अपनी आलोचना प्रक्रिया में वे केवल साहित्य को ही नहीं रखते, बल्कि समाज, राजनीति, इतिहास, अर्थ आदि सबको एक साथ रखकर मूल्यांकन करते हैं। अन्य आलोचकों की तरह उन्होंने किसी रचनाकार का मूल्यांकन सिर्फ लेखकीय कौशल जांचने के लिए नहीं किया, बल्कि उनके मूल्यांकन की कसौटी यह रही कि उस रचनाकार ने अपने समय को कितना जिया। उसके साथ कितना न्याय किया है। 10 अक्टूबर को उनका जन्मदिन है। इस मौके पर