14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Politics : पंचायत चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर, यहां Congress छोड़ BJP में शामिल हुए सैकड़ों कार्यकर्ता 

यह दल-बदल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन जैसा भी था। बताया जा रहा है कि इस दल-बदल का सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों में देखने को मिलेगा।

2 min read
Google source verification
congress bjp

राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पाला बदलने का दौर शुरू हो चुका है। शनिवार को उदयपुर के सायरा क्षेत्र में उस समय कांग्रेस को बड़ा झटका लगा जब क्षेत्र के प्रभावशाली नेता और निवर्तमान प्रधान सवाराम गमेती ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती और देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली की मौजूदगी में हुए इस सदस्यता समारोह ने मेवाड़ के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

भूमि पूजन समारोह के बीच 'शक्ति प्रदर्शन'!

यह दल-बदल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन जैसा भी था। सायरा के राजकीय महाविद्यालय के भूमि पूजन समारोह के दौरान सवाराम गमेती अपने सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं, वर्तमान और पूर्व सरपंचों के साथ भाजपा खेमे में शामिल हुए। इस दौरान गोगुंदा विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई और जमकर नारेबाजी हुई।

गोगुंदा में कांग्रेस के पैर उखड़ने की शुरुआत?

सवाराम गमेती सायरा और गोगुंदा क्षेत्र के आदिवासी समुदाय में एक गहरी पैठ रखने वाले नेता माने जाते हैं। उनके भाजपा में शामिल होने से केवल सायरा ही नहीं, बल्कि पूरी गोगुंदा विधानसभा में कांग्रेस का समीकरण बिगड़ सकता है।

सवाराम के साथ क्षेत्र के कई प्रभावशाली सरपंचों और पूर्व सरपंचों ने भी भाजपा की सदस्यता ली है, जिससे पंचायत स्तर पर कांग्रेस का बुनियादी ढांचा कमजोर हुआ है।

भाजपा की रणनीति, 'मेवाड़ जीत' पर फोकस

भाजपा देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यों से प्रभावित होकर लोग स्वेच्छा से भाजपा से जुड़ रहे हैं। विधायक प्रताप गमेती ने कहा कि सवाराम जी के आने से गोगुंदा में भाजपा का परिवार और अधिक मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों में देखने को मिलेगा।

पंचायत चुनाव: कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

राजस्थान में पंचायत चुनावों के लिए दोनों प्रमुख दल अपनी बिसात बिछा रहे हैं। उदयपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में कांग्रेस की पकड़ हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन सायरा जैसे ब्लॉक में प्रधान स्तर के नेता का पार्टी छोड़ना यह संकेत देता है कि स्थानीय स्तर पर असंतोष गहरा है। यदि कांग्रेस ने समय रहते इसे नहीं संभाला, तो मेवाड़ के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल सकती है।

क्यों हुआ मोहभंग?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्थानीय नेतृत्व और विकास कार्यों की अनदेखी के चलते निवर्तमान प्रधान सवाराम गमेती लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रहे थे। भाजपा ने इस मौके को भुनाया और सही समय पर उन्हें अपने पाले में कर लिया।