
महंगा उपचार या दुर्लभ बीमारी इलाज न करने का आधार नहीं हो सकता,महंगा उपचार या दुर्लभ बीमारी इलाज न करने का आधार नहीं हो सकता,महंगा उपचार या दुर्लभ बीमारी इलाज न करने का आधार नहीं हो सकता
दिल्ली हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति (यहां बच्चे) को सिर्फ इसलिए इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता कि उक्त बीमारी दुर्लभ है या उसका इलाज बहुत महंगा है। दरअसल, एक दुर्लभ बीमारी 'ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्राफी' (डीएमडी) से पीडि़त दो बच्चों के परिजनों की ओर से इलाज के लिए यह याचिकाएं दायर की गई थीं। जस्टिस प्रतिमा एम. सिंह की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दवा या उपचार की अत्यधिक कीमत के कारण बच्चों को इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता। पीठ ने एम्स (AIIMS) से रिपोर्ट देने को भी कहा है।
क्या कहा बेंच ने
-रोगियों विशेषकर बच्चों को उपचार से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
-स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकार अनुच्छेद २१ के तहत एक मौलिक अधिकार है।
-समाज की और अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि यह सुनिश्चित करें कि बच्चों के जीवन से समझौता न हो।
कोर्ट ने यह कहा
न्यायालय ने मसौदा स्वास्थ्य नीति का भी विश्लेषण किया। डीएमडी एक दुर्लभ बीमारी है जिसका उपचार बहुत महंगा है। अदालत ने कहा कि डिजिटल मंच बनाकर दानदाताओं को जोडऩे की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
केंद्र को निर्देश दिया
केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को मसौदा स्वास्थ्य नीति को अंतिम रूप देने के लिए समय सीमा तय की जाए। मंत्रालय बच्च्चों के इलाज के लिए स्वतंत्र संगठनों के जरिए क्राउडफंडिंग विकल्प भी ढूंढे।
याचिका में दी दलील
बच्चों को उपचार मिल सके इसके लिए याचिका में बच्चों के अभिभावकों ने कहा था कि अत्यधिक महंगा इलाज होने के कारण सरकार को दोनों बच्चों का मुफ्त इलाज करवाना चाहिए, क्योंकि यह दुर्लभ बीमारी मसौदा स्वास्थ्य नीति के तहत आती है।
Published on:
20 Jan 2021 01:51 pm
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