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Rajasthan News : कोला डूंगरी गांव की बहन बेटियों की अनूठी पहल, वन मंत्री संजय शर्मा ने भी सराहा 

150 बहन-बेटियों ने लगाए पौधे, भाइयों ने लिया संरक्षण का संकल्प; ‘बहन-बेटी वाटिका’ बनी अपनत्व की नई पहचान, पौधों में बसेंगी यादें और रिश्तों की खुशबू

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Hariyalo Rajasthan Borawar Kolar Dungri Bahan Beti Vatika Sanjay Sharma

Hariyalo Rajasthan Borawar Kolar Dungri PIC

राजपूत समाज की ओर से ग्राम कोलाडूंगरी में आयोजित तीन दिवसीय बाइसा-भुवासा स्नेह मिलन समारोह भावुक माहौल के बीच संपन्न हो गया। समापन दिवस पर बहन-बेटियों ने गांव की मिट्टी में सिर्फ पौधे ही नहीं रोपे, बल्कि रिश्तों की जड़ों को भी और गहरा कर गईं। राजस्थान सरकार के ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत आयोजित ‘एक पौधा बहन-बेटी के नाम’ पहल के अंतर्गत 150 से अधिक बहन-बेटियों और भुवासाओं ने पौधारोपण किया।

वन मंत्री ने की पहल की सराहना

इस अनूठी पहल को राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने भी सराहा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आमजन की जागरूकता और भागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने इस पहल को प्रेरणादायी बताते हुए इसकी प्रशंसा की।

बहन-बेटी वाटिका दिया नाम, महकेंगे रिश्ते

आयोजकों के अनुसार अंतिम दिन सुबह सरकारी विद्यालय के निकट पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिस स्थान पर पौधे लगाए गए, उसे ‘बहन-बेटी वाटिका’ नाम दिया गया है। कार्यक्रम की सबसे भावुक बात यह रही कि पौधे लगाने का कार्य बहन-बेटियों ने किया, जबकि उनकी देखभाल और संरक्षण का जिम्मा गांव के भाइयों और भतीजों ने अपने ऊपर लिया। उन्होंने संकल्प लिया कि इन पौधों को उसी अपनत्व और जिम्मेदारी से संभालेंगे, जैसे रिश्तों को संजोकर रखा जाता है।

स्नेह मिलन में शामिल महिलाओं ने कहा कि वर्षों बाद गांव में एकत्र होकर बिताए गए ये पल जिंदगी भर याद रहेंगे। ऐसे में लगाए गए पौधे भी आने वाले वर्षों में उन यादों और रिश्तों की खुशबू को संजोए रखेंगे। यही वजह है कि बहन-बेटी वाटिका अब केवल पौधों का समूह नहीं, बल्कि गांव और उसकी बेटियों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गई है।

धर्म और रिश्तों का संगम भी दिखा

समारोह के अंतिम दिन एकादशी के अवसर पर धार्मिक यात्रा का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने पुष्कर, खुडद सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। इससे कार्यक्रम में सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव के साथ धार्मिक आस्था का रंग भी देखने को मिला।

ऐसा लगा जैसे बचपन फिर लौट आया हो…

समापन और विदाई के समय माहौल भावुक हो गया। बहन-बेटियों की आंखें नम थीं और चेहरों पर तीन दिनों तक मिले अपनत्व की खुशी झलक रही थी। उन्होंने कहा, “ऐसा लगा जैसे बचपन फिर लौट आया हो। वर्षों की दूरियां कुछ ही पलों में मिट गईं। हर गम और चिंता भूल गए। अब यहां से जाने का मन नहीं कर रहा, लेकिन गांव में लगाए गए ये पौधे हमारी यादों को हमेशा जीवित रखेंगे।” बहन-बेटियों ने आयोजन समिति और गांववासियों का आभार जताते हुए कहा कि यह स्नेह मिलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से जीने और संजोने का अवसर बन गया।