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पर्यावरण के अनुकूल फैशन को सबसे ज्यादा अपना रहे भारतीय

टिकाऊ फैशन संबंधी खरीदारी के मामले में भारत पहले स्थान पर है जबकि चीन, दूसरे और अमरीका, तीसरे नंबर पर हैं। भारत में टिकाऊ फैशन मार्केट अभी भी अपने शुरुआती दौर में है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि हुई है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Apr 13, 2023

पर्यावरण के अनुकूल फैशन को सबसे ज्यादा अपना रहे भारतीय

पर्यावरण के अनुकूल फैशन को सबसे ज्यादा अपना रहे भारतीय

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए भारतीय, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल फैशन को अपना रहे हैं। स्टेटिस्टा कंज्यूमर इनसाइट्स सर्वेक्षण 2021 के अनुसार 81 प्रतिशत भारतीय किसी भी तरह के कपड़े, जूते या एसेसरीज खरीदते समय ध्यान रखते हैं कि वे ऐसे उत्पाद लें जिनके निर्माण में कम से कम कार्बनडाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ हो। टिकाऊ फैशन संबंधी खरीदारी के मामले में भारत पहले स्थान पर है जबकि चीन, दूसरे और अमरीका, तीसरे नंबर पर हैं। भारत में टिकाऊ फैशन मार्केट अभी भी अपने शुरुआती दौर में है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि हुई है।

ब्रिटेन में एक साल से नहीं पहने गए 25% कपड़े:

यह सर्वे दुनिया के 56 से अधिक देशों और क्षेत्रों में किया गया। चीन में 69 प्रतिशत लोग ग्रीन फैशन को महत्व देते हैं। यहां के 77 प्रतिशत उपभोक्ता टिकाऊ फैशन उत्पादों के लिए 5-20 प्रतिशत अधिक भुगतान करने के लिए भी तैयार हैं। इनमें भी युवाओं की संख्या अधिक है। ब्रिटेन के पर्यावरणीय समूह 'वेस्ट एंड रिर्सोसेज एक्शन प्रोग्राम' की बीते वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार यहां के लगभग आधे लोग महीने में कम से कम एक बार कपड़े खरीदते हैं, जबकि 13 फीसदी ऐसा हर सप्ताह करते हैं। इतना ही नहीं इस देश में अलमारी में रखे एक चौथाई से अधिक कपड़े एक साल से पहने ही नहीं गए। ऐसे में जरूरी है कि फैशन उद्योग 'फास्ट फैशन' (अधिक मुनाफा कमाने के लिए जब कंपनियां सस्ते कपड़े बनाती हैं) से हटकर अधिक इको-फ्रेंडली बनने की ओर बढ़े। फिलहाल 39 फीसदी ब्रिटिश आबादी टिकाऊ फैशन संबंधी खरीदारी करती है।

टिकाऊ फैशन पर अधिक खर्च करने को तैयार भारतीय:

सर्वेक्षण में पाया गया कि 45 प्रतिशत भारतीय टिकाऊ फैशन के लिए अधिक खर्च करने को भी तैयार हैं, यदि इसका निर्माण पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया है। भारत में टिकाऊ फैशन की खरीदारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानदंड गुणवत्ता, कीमत और आराम हैं। केवल 47 प्रतिशत भारतीय ब्रांड या निर्माता को देखकर खरीदारी करते हैं। हाल के वर्षों में भारत में स्थायी फैशन की मांग बढ़ी है, जो उपभोक्ताओं में जागरूकता, सतत विकास को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों और टिकाऊ सामग्री की उपलब्धता का परिणाम है। रिसर्च एंंड मार्केट्स डॉट कॉम के अनुसार 2026 तक भारत में स्थायी फैशन मार्केट के 10.6 फीसदी की सालाना दर से बढ़ने की संभावना है।

ग्रीन फैशन को बढ़ावा देने में स्टार्टअप्स की भूमिका:

भारत के स्थायी फैशन मार्केट में कई स्टार्टअप्स उभरे हैं। ये स्टार्टअप उपभोक्ताओं को आकर्षित करने वाले अनूठे उत्पादों को बनाने के लिए नई तकनीकों और टिकाऊ सामग्रियों का प्रयोग कर रहे हैं। इन स्टार्टअप्स से न केवल ग्रीन फैशन मार्केट में नवीनता आई है बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। कई मशहूर हस्तियों और इंफ्ल्यूएंसर्स ने भी प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इको-फ्रेंडली फैशन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है। लेकिन बढ़ती मांग और अवसरों के बावजूद बुनियादी ढांचे की कमी, खंडित आपूर्ति श्रृंखला और छोटे उद्यमियों की तकनीक तक पहुंच न होना इस क्षेत्र के लिए चुनौती बन रही हैं।

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