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महाराष्ट्र के पूर्व सीएम शरद पवार का आज है हैप्पी बर्थडे

1978 में शरद ने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए जनता पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई

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Jameel Ahmed Khan

Dec 12, 2015

Sharad Pawar

Sharad Pawar

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार का शनिवार को जन्मदिन है। 12 दिसंबर 1940 को बारामती जिले से 10 किलोमीटर दूर स्थित कटेवाड़ी में गोंविदराव पवार के परिवार में
जन्में शरद पवार आज 74 वर्ष के हो गए हैं। वह महाराष्ट्र के 4 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और साथ ही केंद्र में रक्षा एवं कृषि जैसे अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं।

पवार ने बृहान महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई की है। उन्होंने राजनीति में कदम 1967 में रखा। इस साल वह पहली बार कांग्रेस की टिकट पर बारामती से महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए। यशवंत राव चव्हाण उनके राजनैतिक सलाहकार थे। 1978 में शरद ने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए जनता पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई। इस दौरान वह महाराष्ट्र के पहली बार मुख्यमंत्री बने। 1980 में इंदिरा गांधी के पुन: प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रदेश की इस सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था।

1980 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस (आई) सत्ता में लौट आई और पार्टी ने अब्दुल रहमान अंतुले को प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त किया। वहीं, 1983 में पवार को उनकी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस (सोशलिस्ट) का अध्यक्ष चुन लिया गया। 1984 में हुए आम चुनावों में वह पहली बार बारामती से लोकसभा के लिए चुन लिए गए।
अगले साल 1985 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बारामती से चुने गए। प्रदेश राजनीति में दिलचस्पी होने के कारण उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। उनकी पार्टी ने 288 सीटों में से 54 सीटों में जीत दर्ज की और उन्हें विपक्ष का नेता चुन लिया गया।


1987 में वह पुन: कांग्रेस (आई) में लौट आए। कहा जाता है कि महाराष्ट्र में शिव सेना के बढ़ते कद के चलते वह पुन: अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए थे। जून 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने प्रदेश के मुखिया शंकरराव चव्हाण को केंद्रीय वित्तमंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल करने का मन बना लिया था जिसके चलते शरद पवार को पुन: प्रदेश की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी मिल गई। उनकी मुख्ख्य जिम्मेदारी शिव सेना के बढ़ते कद को रोकना था जो कांग्रेस के लिए वहां चुनौती बनती जा रही थी। 1989 के आम चुनावों में कांग्रेस प्रदेश की 48 में से 28 सीटें जीतने में कामयाब हो गई थी। अगले साल फरवरी में विधानसभा के लिए हुए चुनाव में शिव सेना-भ्भाजपा गठबंधन ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, कांग्रेस 288 में से 141 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत से दूर रह गई। 4 मार्च 1990 को पवार को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। उनकी सरकार को 12 निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन दिया।

वर्ष 1991 में आम चुनावों के प्रचार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। मीडिया में खबरें आईं की पी वी नरसिम्हा राव और एनडी तिवाड़ी के साथ प्रधानमंत्री पद के लिए शरद पवार के नाम की भी चर्चा की जा रही है।

हालांकि, कांग्रेस सांसदों ने राव को पीएम पद के लिए चुन लिया। 21 जून 1996 को राव ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली। राव ने पवार को देश का रक्षामंत्री नियुक्त कर दिया। उन्होंने 26 जून 1991 को मंत्रालय का पदभार संभाल लिया।

वह इस पद पर मार्च 1993 तक बने रहे। पवार की जगर महाराष्ट्र में सीएम बनाए गए सुधाकर राव नाइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया तो शरद पवार को फिर से प्रदेश का मुखिया नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने 6 मार्च 1993 को सीएम पद की शपथ ले ली। लेकिन, उनके शपथ लेने के थोड़़े दिनों बाद ही 12 मार्च को मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठी।

1993 में बृहनमुंबई म्यूनिसपिल कॉर्पोरेशन के उपायुक्त जी आर खैरनार ने शरद पवार के भ्रष्टाचार में डूबे होने के कई आरोप लगाए, लेकिन वह अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाए। हालांकि, पवार की छवि पर काफी असर पड़ा। वर्ष 1995 में विधानसभा के लिए हुए चुनाव में शिव सेना-भाजपा गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 138 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस पार्टी में विद्रोह हो गया। कांग्रेस महज 80 सीटें ही जीत पाई। नतीजों के बाद शरद पवार ने इस्तीफा दे दिया और 14 मार्च 1995 को मनोहर जोशी प्रदेश के नए सीए बने।

1996 के लोकसभा चुनाव तक शरद पवार महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता रहे। बारामती से सांसद चुने जाने के चलते उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। जून 1997 में कांग्रेस अध्यक्ष के लिए हुए चुनाव में सीताराम केसरी ने शरद पवार को पटखनी देते हुए इस पद पर पहुंचने पर कामयाब रहे। 1998 में लोकसभा के लिए हुए मध्यपूर्व चुनाव में कांग्रेस ने महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से 33 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। 12वीं लोकसभा में शरद विपक्ष के नेता चुने गए।

1999 में जब 12वीं लोकसभा को भंग करने के लिए 13वीं लोकसभा के लिए चुनावों की घोषणा की गई तो शरद पवार ने तारीक अनवर और पीए संगमा के साथ कांग्रेस से यह कहते हुए बगावत कर दी की प्रधानमंत्री पद के लए देश में पैदा हुए व्यक्ति को ही खड़ा किया जाना चाहिए न की ईटली में पैदा हुई सोनिया गांधी जो कुछ समय पहले सीताराम केसरी की जगह पार्टी अध्यक्ष बन राजनीति में शामिल हुई थीं।

पवार ने अनवर और संगमा के साथ मिलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के रूप में नई पार्टी का गठन किया। हालांकि, महाराष्ट्र विधानसभा के लिए 1999 में हुए चुनाव में चूंकी कोई भी दल बहुमत हासिल नहीं कर पाया था जिसके चलते राकांपा ने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर प्रदेश में गठबंधन सरकार बनाई। लेकिन, प्रदेश की राजनीति में लौटने की बजाए पवार ने केंद्र में ही रहना बेहतर समझा। इस गठबंधन सरकार का मुखिया विलासराव देशमुख को चुना गया, जबकि छगन भुजबल उपमुख्यमंत्री चुने गए।

वर्ष 2004 में हुए आम चुनावों के बाद मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बनी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में शरद पवार को शामिल किया गया और उन्हें कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2012 में उन्होंने घोषणा की कि युवा नेताओं को मौका देने के लिए वह 2014 के चुनाव में खड़े नहीं होंगे।

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