
लड़कियों में आत्मविश्वास घटा रहीं सोशल पाबंदियां
लंदन। एआइ से लेकर तकनीक की अंतहीन प्रगति के बावजूद दुनियाभर में महिलाओं और बच्चियों को वैश्विक डिजिटल विभाजन का सामना करना पड़ रहा है। गैर लाभकारी संगठन गर्ल्स इफेक्ट और अन्य संस्थाओं के सहयोग से तैयार '2023 गर्ल्स एंड मोबाइल' रिपोर्ट के अनुसार समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता और धारणाएं महिलाओं व लड़कियों के इंटरनेट उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। यह स्थिति उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर असर डालकर सूचना और काम तक उनकी पहुंच को बाधित कर देती है। रिपोर्ट में पाया गया कि लड़कियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्हें बताया जा रहा है कि वे ऑनलाइन असुरक्षित और इंटरनेट का प्रयोग करने में सक्षम नहीं हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास में कमी आ रही है।
इंटरनेट के उपयोग पर अधिक सतर्क लड़कियां:
यह सर्वे इथियोपिया, केन्या, नाइजीरिया, तंजानिया और भारत सहित आधा दर्जन से अधिक देशों में 14-21 आयु वर्ग के 10,000 से अधिक यूजर्स और उनके माता-पिता के बीच किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियां खुद को ऑनलाइन ज्यादा सुरक्षित बना रही हैं और दूसरों के साथ जुड़ने, निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करते हुए अधिक रुढ़िवादी व्यवहार अपनाती हैं जैसे अनुचित व्यवहार को रिपोर्ट करना या अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट रखना आदि। यह दृष्टिकोण लड़कियों की इंटरनेट तक पहुंच और कार्यस्थल पर महिलाओं के व्यवहार को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। साथ ही महिलाओं के लिए नौकरियों और तरक्की के अवसरों को भी रोकता है।
सशर्त मिलती है मोबाइल के उपयोग की अनुमति:
दुनियाभर में मोबाइल डिवाइस के बढ़ते दामों और महंगे इंटरनेट डाटा ने भी डिजिटल विभाजन को बढ़ाया है। कोरोना महामारी के दौरान और उसके बाद लगभग एक तिहाई लड़कियों की ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच नहीं थी। यह कमी तनाव का एक बड़ा कारण थी क्योंकि उन्हें स्कूल में अपने साथियों से पिछड़ जाने का डर था। आमतौर पर किशोरों को सशर्त मोबाइल फोन के प्रयोग की अनुमति मिलती है। अधिकांश लड़कियां घर का सारा काम करने या होमवर्क के बाद ही मोबाइल फोन का उपयोग कर पाती हैं। ऐसे में कई बार उन्हें छिपकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
एक्सपर्ट व्यू:
ऑफलाइन लैंगिक भेदभाव न केवल लड़कियों को डिजिटल उपकरणों तक पहुंचने से रोक रहा है बल्कि ऑनलाइन जुड़ने की उनकी अपनी क्षमता के बारे में धारणाओं को आकार दे रहा है। केवल उपकरणों तक पहुंच से डिजिटल विभाजन कम नहीं हो सकता। इसके लिए उन सामाजिक और संरचनात्मक चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरूरत है, जो लड़कियां रोजाना अनुभव करती हैं।
जेसिका पोस्नर ओडेडे, सीइओ, गर्ल्स इफेक्ट
Published on:
28 Sept 2023 11:28 am
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