राजनीतिक समीक्षकों की राय थी कि इन्द्र कुमार गुजराल एक योग्य, सक्षम और अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इनके साथ राजनयिक चर्चाएं करती थीं। यह मास्को में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। कांग्रेस में इनकी छवि योग्य और ईमानदार व्यक्ति की थी। लेकिन राजनीतिज्ञों ने इनके प्रधानमंत्री बनते ही यह कहना आरम्भ कर दिया कि गुजराल भी ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री के पद पर नहीं रहेंगे, क्योंकि कांग्रेस लम्बे समय तक फील्डिंग नहीं करना चाहेगी। इन्द्र कुमार गुजराल 21 अप्रैल, 1997 से 19 मार्च, 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर रहे, क्योंकि कांग्रेस ने एन. डी. ए. से अपना समर्थन वापस ले लिया था। लेकिन गुजराल प्रधानमंत्री के रूप में अधिक सक्रिय रहे।