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जन्मदिन- एक बेहतर कूटनीतिज्ञ थे पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल

प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने से पूर्व गुजराल को केन्द्र में राज्यमंत्री के तौर पर विभिन्न मंत्रालयों को सम्भालने का मौका भी प्राप्त हुआ।

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Dec 04, 2015
Inder Kumar Gujral birthdya
इन्द्र कुमार गुजराल का जन्म आज ही के दिन 4 दिसम्बर, 1919 को झेलम में हुआ था। गुजराल भारत के बारहवें प्रधानमंत्री थे। यह उस समय प्रधानमंत्री बने जब कांग्रेस की समर्थन वापसी के भय से संयुक्त मोर्चा सरकार ने नेतृत्व परिवर्तन की उसकी मांग स्वीकार कर ली। तब एच. डी. देवगौड़ा को 10 माह के पश्चात प्रधानमंत्री का पद छोडऩा पड़ा। उन्होंने 21 अप्रैल, 1997 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और इसी दिन इन्द्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त हो गए। लेकिन यह भी ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री के पद को सुशोभित नहीं कर सके। 19 मार्च, 1998 को कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बाद उन्हें भी पद छोडऩा पड़ा। इस प्रकार इन्द्र कुमार गुजराल लगभग एक वर्ष तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।

जन्म एवं परिवार
इन्द्र कुमार का जन्म 4 दिसम्बर, 1919 को झेलम में हुआ था, जो उस समय पंजाब प्रान्त का अविभाजित हिस्सा था। इनके पिता का नाम अवतार नारायण गुजराल तथा माता का नाम पुष्पा गुजराल था। इन्द्र कुमार गुजराल का विवाह 26 मई, 1946 को शीला देवी के साथ सम्पन्न हुआ। इनके पिता अवतार नारायण गुजराल ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया था। इन्द्र कुमार गुजराल स्वयं 12 वर्ष की उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगे थे। 1931 में इन्हें ब्रिटिश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। युवा बच्चों को शासन के विरुद्ध भड़काने के आरोप में पुलिस ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। यह सब झेलम में ही हुआ था। फिर 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय 23 वर्ष की उम्र में इन्हें जेल भी जाना पड़ा।

गुजराल ने बी. कॉम., एम. ए., पी. एच. डी. एवं डी. लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। वह धारा प्रवाह उर्दू बोलते हैं और उर्दू काव्य में भी उनका योगदान रहा। इनके भाई सतीश गुजराल विख्यात पेंटर और शिल्पकार हैं। इनकी पत्नी शीला देवी कवयित्री एवं लेखिका हैं। इनके दो पुत्र नरेश एवं विशाल हैं। इनकी दो पौत्रियाँ दीक्षा और दिव्या तथा एक पौत्र अनिध्य गुजराल हैं।

राजनीतिक जीवन
प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने से पूर्व गुजराल को केन्द्र में राज्यमंत्री के तौर पर विभिन्न मंत्रालयों को सम्भालने का मौका भी प्राप्त हुआ। इन्होंने संचार एवं संसदीय कार्य मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सड़क एवं भवन मंत्रालय तथा योजना एवं विदेश मंत्रालय के कार्य भी सम्भाले थे। बाद में इन्होंने राजनयिक रूप में इंदिरा गांधी को अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इन्द्र कुमार गुजराल कांग्रेस पार्टी के साथ लम्बे समय तक जुड़े रहे। इन्हें इनकी योग्यता के अनुरूप कांग्रेस में सम्मान भी प्राप्त हुआ। लेकिन इंदिरा गांधी के जीवित रहते ही इन्हें कांग्रेस पार्टी की उपेक्षा का शिकार भी होना पड़ा। लेकिन जब 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई और राजीव गांधी प्रधानमंत्री तो स्थितियां इनके प्रतिकूल हो गईं। राजीव गांधी का झुकाव युवाओं की ओर ज्यादा था। जब गुजराल को लगा कि कांग्रेस पार्टी में उनके लिए कोई स्थान नहीं रह गया है तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी का त्याग करके जनता दल में स्थान ग्रहण कर लिया।

विभिन्न उपलब्धियां
राजनीतिक समीक्षकों की राय थी कि इन्द्र कुमार गुजराल एक योग्य, सक्षम और अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इनके साथ राजनयिक चर्चाएं करती थीं। यह मास्को में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। कांग्रेस में इनकी छवि योग्य और ईमानदार व्यक्ति की थी। लेकिन राजनीतिज्ञों ने इनके प्रधानमंत्री बनते ही यह कहना आरम्भ कर दिया कि गुजराल भी ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री के पद पर नहीं रहेंगे, क्योंकि कांग्रेस लम्बे समय तक फील्डिंग नहीं करना चाहेगी। इन्द्र कुमार गुजराल 21 अप्रैल, 1997 से 19 मार्च, 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर रहे, क्योंकि कांग्रेस ने एन. डी. ए. से अपना समर्थन वापस ले लिया था। लेकिन गुजराल प्रधानमंत्री के रूप में अधिक सक्रिय रहे।

पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ लम्बे समय से सम्बन्धों में तनाव था। गुजराल विदेश नीति के विशेषज्ञ थे, इस कारण इन्होंने पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने के कूटनीतिक प्रयास किए। गुजराल के कार्यकाल में वित्तीय संकट था। आर्थिक विकास दर गिरावट की ओर अग्रसर थी। इन्होंने आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक योजनाएं बनाईं। लेकिन देश में पड़े अकाल ने अर्थव्यवस्था का गणित अधिक बिगाड़ दिया। फिर यह ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री नहीं रहे। लेकिन इनके प्रयास असरदार होने के अतिरिक्त ईमानदाराना भी थे। केन्द्रीय सरकार के अस्थिर होने के कारण नौकरशाही का भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया था। अधिकारीगण निरकुंश हो गए थे और सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। गुजराल ने प्रशासनिक रूप से नौकरशाही पर अंकुश लगाने का कार्य किया।

निधन
पूर्व प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल का 92 साल की उम्र में 30 नवम्बर 2012 को निधन हो गया। गुडग़ांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती रहे गुजराल की फेफड़े में संक्रमण की वजह से मौत हुई।
Published on:
04 Dec 2015 12:39 am
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