महमूद के किस्मत का सितारा तब चमका जब फिल्म नादान की
शूटिंग के दौरान अभिनेत्री मधुबाला के सामने एक जूनियर कलाकार लगातार दस रीटेक के
बाद भी अपना संवाद नहीं बोल पाया। फिल्म निर्देशक हीरा सिंह ने यह संवाद महमूद को
बोलने के लिए दिया जिसे उन्होंने बिना रिटेक एक बार में ही ओके कर दिया। इस फिल्म
में महमूद को बतौर 300 रूपये प्राप्त हुए जबकि बतौर ड्राइवर महमूद को महीने मे
मात्र 75 रूपए ही मिला करते थे। इसके बाद महमूद ने ड्राइवरी करने का काम छोड़ दिया
और अपना नाम जूनियर आर्टिस्ट एसोसिएशन मे दर्ज करा दिया। बतौर जूनियर आर्टिस्ट
महमूद ने दो बीघा जमीन, जागृति, सी. आई.डी., प्यासा जैसी फिल्मों में छोटे मोटे रोल
किए जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ। इसी दौरान महमूद ने ए.भी.एम के बैनर तले
बनने वाली फिल्म मिस मैरी के लिये स्क्रीन टेस्ट दिया। लेकिन ए.भी.एम बैनर ने महमूद
को स्क्रीन टेस्ट में फेल कर दिया। महमूद के बारे में ए.भी.एम की राय कुछ इस तरह की
थी कि वह ना कभी अभिनय कर सकते है ना ही अभिनेता बन सकते है।