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हैप्पी बर्थडे साहिब सिंह वर्मा

साहिब सिंह वर्मा का जन्म 15 मार्च, 1943 को बाहरी दिल्ली के मुंडका गांव में एक किसान परिवार में हुआ था

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Jameel Ahmed Khan

Mar 15, 2016

Sahib Singh Verma

Sahib Singh Verma

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और 13वीं लोकसभा (1999-2004) के सदस्य रहे साहिब सिंह वर्मा का जन्म 15 मार्च, 1943 को बाहरी दिल्ली के मुंडका गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी मां का नाम भरपाई देवी और पिता का नाम मीर सिंह था। 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें अपनी सरकार में श्रम मंत्री नियुक्त किया था। इससे पूर्व, साहिब सिंह 1996 से 1998 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री भी रहे। 30 जून, 2007 को जयपुर-दिल्ली हाईवे पर एक कार दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। सीकर जिले के नीम का थाना तहसील में एक स्कूल की आधारशीला रखने के बाद वह दिल्ली लौट रहे थे जब यह दुर्घटना हुई।

उन्होंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत आरएसएस के सामान्य स्वयंसेवक के रूप में की। बाद में वह सफलतापूर्वक राजनैतिक सीढिय़ां चढ़ते गए। उन्होंने 1954 में साहिब कौर से शादी की। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। उनके बेटे प्रवेश वर्मा ने भाजपा की टिकट पर 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा अध्यक्ष योगानंद शास्त्री को हराकर विधायक बने। 2014 के आम चुनाव में प्रवेश पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से रिकॉर्ड 2 लाख 68 हजार 586 से जीतकर सांसद बने।

राजनैतिक करियर
साहिब सिंह वर्मा 1977 में हुए दिल्ली नगर निगम के चुनाव में जनता पार्टी की टिकट पर पार्षद चुने गए। हालांकि, बाद में वह भाजपा की टिकट पर फिर से पार्षद चुने गए। 1993 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मदन लाल खुराना के नेतृत्व में सरकार बनाई। इस सरकार में उन्हें शिक्षा और विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1996 में भ्रष्टाचार के आरोपों से मदन लाल खुराना की जगह वर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, कोर्ट ने खुराना को इन सभी आरोपों से बरी कर दिया था। वर्मा इस पद पर ढाई साल तक रहे। इस दौरान खुराना से उन्हें कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा। 1998 में प्याज के बढ़ते दामों के चलते भाजपा ने वर्मा को हटाकर सुषमा स्वराज को दिल्ली का मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया। हालांकि, वह इस पद पर करीब 45 दिन ही रह पाईं। 1999 के आम चुनाव में वर्मा आउटर दिल्ली से सांसद चुने गए। 2002 में वाजपेयी में उन्हें अपने कैबिनेट में शामिल कर श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। 2004 के आम चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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