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पांच साल के ब्रेक के बाद फिर फिल्मों में लौट रहे हैं अक्षय खन्ना

अक्षय पांच साल के बाद 'ढिशुम' के जरिए बड़े पर्दे पर एक बार फिर नजर आएंगे

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Jameel Ahmed Khan

Mar 28, 2016

Akshaye Khanna

Akshaye Khanna

मुंबई। अभिनेता और राजनेता विनोद खन्ना के पुत्र और 1997 में 'हिमालयपुत्र' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अक्षय खन्ना का जन्म 28 मार्च, 1975 को मुंबई में हुआ था। वह बॉलीवुड अभिनेता राहुल खन्ना के छोटे भाई हैं। हिमालयपुत्र के बाद वह कई फिल्मों और विज्ञापनों में नजर आ चुके हैं। उनकी पहली फिल्म का निर्माण उनके पिता ने ही किया था। वह दो बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्होंने जिन प्रमुख फिल्मों में काम किया वे हैं 'बॉर्डर', 'ताल',
'दिल चाहता है', 'हलचल', रेस, 'हमराज', 'गांधी, माय फादर', आदि। इनमें से दिल चाहता है, हमराज और गांधी माय फादर उनकी बेहतरीन फिल्मों में से एक है।

हालांकि, पिछले पांच सालों से उन्होंने बॉलीवुड से 'ब्रेक' ले रखा था। 2016 में उनकी फिल्म 'ढिशुम' रिलीज होगी।

करियर
मुंबई के किशोर नमित कपूर एटिंग स्कूल से कोर्स करने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपना एटिंग करियर 1997 में आई फिल्म 'हिमालयपुत्र' से शुरू किया। इस फिल्म का निर्माण उनके पिता विनोद खन्ना ने किया था। हालांकि, फिल्म टिकट
खिड़की पर कुछ खास नहीं कर पाई। इसी साल आई उनकी दूसरी फिल्म 'बॉर्डर' ने उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार दिलवाया। इस फिल्म का निर्माण जेपी दत्ता ने किया था। इसके बाद वह 'मोहब्बत', 'कुदरत', 'लावारिस', 'लव यू हमेश' और 'दहक : ए बर्निंग पैशन' में नजर आए, लेकिन ये फिल्में टिकट खिड़की पर कुछ खास नहीं कर पाई।

1999 में वह ऋषि कपूर द्वारा निर्देशित 'आ अब लौट चले' में ऐश्वर्या राय के साथ नजर आए, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने औसत कमाई की। हालांकि, उनकी एटिंग की काफी तारीफ की गई। इसके बाद सुभाष घई ने उन्हें अपनी फिल्म 'ताल' में लिया। इस फिल्म में ऐश्वर्या एक बार फिर उनके साथ नजर आई। टिकट खिड़की पर फिल्म हिट साबित हुई। 2001 में फरहान अख्तर के निर्देशन में बनी दिल चाहता है उनके करियर के लिए टर्निंग पोइंट साबित हुई। फिल्म ने
बॉक्स ऑफिस ने धूम मचाई। इस फिल्म ने अक्षय का ही नहीं, सैफ के करियर में भी जान फूंक दी। एक साल बाद आई अब्बास-मस्तान की एक्शन थ्रिलर फिल्म 'हमराज' ने उनके करियर में और जान फूंक दी। इस फिल्म में बॉबी देओल

मुख्य रोल में थे, जबकि अक्षय ने खलनायक का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने कॉमेडी में भी हाथ आजमाया। उन्होंने प्रियदर्शन निर्देशित हंगामा और हलचल में भी काम किया। बॉक्स ऑफिस पर दोनों फिल्में हिट साबित हुईं। हालांकि, इनके बाद उनकी जो फिल्में आईं, वे बॉक्स ऑफस पर असफल साबित हुईं। 2008 में आई अब्बास-मस्तान की फिल्म 'रेस' ने उनके करियर में एक बार फिर जान फूंक दी। इस फिल्म में भी वह खलनायक बने थे। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार भी मिला था।

हालांकि, 2007 में आई गांधी, माय फादर में उन्होंने जो अभिनय किया था, उसे अबतक का उनका बेहतरीन अभिनय माना जाता है। फिल्म में उन्होंने महात्मा गांधी के बड़े बेटे हरीलाल गांधी का किरदार निभाया था। 2010 में वह अनीस बाज्मी के निर्देशन में बनी फिल्म 'नो प्रोब्लम' में नजर आए थे। इसमें संजय दत्त, कंगना रनौत और अनिल कपूर अहम भूमिका में थे, लेकिन टिकट खिड़की पर फिल्म कुछ खास नहीं कर पाई। इसी साल आई उनकी दो फिल्में आक्रोश और तीस मार खान में उनके अभिनय की आलोचकों ने काफी प्रशंसा की। अब अक्षय पांच साल के बाद 'ढिशुम' के जरिए बड़े पर्दे पर एक बार फिर नजर आएंगे।