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हैप्पी बर्थडे : अभिनेत्री से नेता बनी स्मृति ईरानी

स्मृति जुबिन ईरानी का जन्म 23 मार्च, 1976 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ था

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Jameel Ahmed Khan

Mar 23, 2016

smriti irani

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नई दिल्ली। महिला राजनीतिज्ञ, टीवी अभिनेत्री और निर्माता स्मृति जुबिन ईरानी का जन्म 23 मार्च, 1976 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ था। तीन बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। वह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गई थी क्योंकि उनके दादा भी आरएसएस से जुड़े हुए थे और उनकी मां जनसंघ की सदस्य थी। उन्होंने स्कूली शिक्षा नई दिल्ली से पूरी की। वर्तमान में वह नरेंद्र मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री हैं।

अभिनय करियर
ईरानी 1998 में मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताब जीतने से चूक गईं। उन्होंने अपना अभिनय करियर वर्ष 2000 में टीवी सीरियल 'हम हैं आज कल और कल' के साथ अपने करियर की शुरुआत की। लेकिन, उन्हें कामयाबी एकता कपूर के सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से मिली। इस सीरियल में उन्होंने लीड रोल (तुलसी विरानी) निभाया था। उइंडियन टेलीविजन अकादमी एवार्ड लगातार पांच बार जीतकर उन्होंने एक रिकॉर्ड बनाया। निर्माता एकता कपूर से अनबन के कारण उन्होंने जून 2007 को सीरियल छोड़ दिया। उनकी जगह गौतमी कपूर को लिया गया। हालांकि, 2008 में एक विशेष रोल के जरिए वह फिर से सीरियल के साथ जुड़ गई। 2001 में जी टीवी के 'रामायण' में उन्होंने सीता का किरदार निभाया। 2006 में आए 'थोड़ी सी जमीन, थोड़ा सा आसमान' सीरियल की सह-निर्माता थीं। इस सीरियल में उन्होंने उमा का लीड रोल निभाया था। 2007 में उन्होंने सोनी टीवी पर प्रसारित सीरियल 'विरुद्ध' को प्रोड्यूस किया। इसमें भी उन्होंने 'वसुधा' का लीड रोल निभाया। 2008 में उन्होंने टीवी की एक और मशहूर अभिनेत्री साक्षी तंवर के साथ डांस पर आधारित सीरियल 'ये है जलवा' को होस्ट किया था।

राजनैतिक जीवन
स्मृति ईरानी का राजनैतिक करियर 2003 में शुरू हुआ था जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वह 2004 में महाराष्ट्र युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष बनीं। 2004 के आम चुनाव में वह दिल्ली की चांदनी चौक सीट से कांग्रेस नेता कपिल सिबल के खिलाफ मैदान में उतरीं। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारीणि में उन्हें कार्यकारी सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। दिसंबर 2004 में उन्होंने धमकी दी कि अगर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पद से नहीं हटाया गया तो वह भूख हड़ताल पर चली जाएंगी। उनका मानना था कि मोदी के कारण ही भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। लेकिन, भाजपा हाई कमान की सख्ती के चलते उन्हें भूख हड़ताल पर जाने का फैसला वापस लेना पड़ा।

मई 2009 में हुए आम चुनाव में विजय गोयल के लिए चुनाव प्रचार करते हुए उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बलात्कारियों को मौत की सजा देने का समर्थन किया। 2010 के शुरुआत में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया। 24 जून को उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अगस्त 2011 में वह गुजरात से संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा पहुंची। 2014 के आम चुनावों में भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश की अमेठी से अपना उम्मीदवार घोषित किया। यहां से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास भी मैदान में थे। ईरानी राहुल से एक लाख 7 हजार 923 मतों से हार गईं। 26 मई, 2014 को नरेंद्र मोदी ने उन्हें में कैबिनेट में शामिल किया। उन्हें मानव संसाधन विकास जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, उनकी नियुक्ति की कई लोगों ने आलोचना भी की।

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