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एआइ कौशल बढ़ाने में भारत पूरी दुनिया में सबसे आगे

भारत का 75 फीसदी डेटा साइंटिस्ट और एआइ टैलेंट 18-29 वर्ष की आयु के बीच है। कुल एआइ पेशेवरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। यह आंकड़ा वैश्विक औसत (18%) से अधिक है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Feb 19, 2023

एआइ कौशल बढ़ाने में भारत पूरी दुनिया में सबसे आगे

एआइ कौशल बढ़ाने में भारत पूरी दुनिया में सबसे आगे

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) कौशल को बढ़ाने में दुनियाभर में पहले स्थान पर है। जबकि एआइ से जुड़े वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में देश का पांचवा स्थान है। नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) की रिपोर्ट के अनुसार भारत का 'एआइ स्किल्स पेनिट्रेशन फैक्टर' 3.09 फीसदी है, जो जी20 और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओइसीडी) देशों में सर्वाधिक है। अन्य देशों के मुकाबले भारत की तकनीकी प्रतिभा में एआइ कौशल होने की संभावना तीन गुना अधिक है।

तेजी से बढ़ रही एआइ टैलेंट की मांग:

अगले साल तक देश में एआइ पेशेवरों की संख्या 10 लाख से अधिक होने का अनुमान है। साथ ही डेटा साइंटिस्ट की मांग भी बढ़ेगी। वर्तमान में एआइ पेेशेवरों की संख्या फिलहाल कम है लेकिन देशभर में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि देश में मांग और पूर्ति का यह अंतर (51%) अभी भी अमरीका (75%) और जर्मनी (63%) के अंतराल से कम है। देश में एआइ कौशल बढ़ाने चाले पांच प्रमुख उद्योग शिक्षा, वित्त, हार्डवेयर और नेटवर्किंग, विनिर्माण, सॉफ्टवेयर एवं आइटी सेवाएं हैं।

एआइ पेशेवरों में एक-चौथाई महिलाएं:

भारत का 75 फीसदी डेटा साइंटिस्ट और एआइ टैलेंट 18-29 वर्ष की आयु के बीच है। कुल एआइ पेशेवरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। यह आंकड़ा वैश्विक औसत (18%) से अधिक है। एआइ जगत में काम कर रही भारतीय महिलाओं के पास शून्य से पांच वर्ष का अनुभव है, जो एंट्री लेवल के प्रोफाइल को दर्शाता है। क्लीनिकल डेटा कॉर्डिनेटर, डेटा इंजीनियर और बिजनेस इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट आदि के रूप में महिलाएं सबसे ज्यादा कंज्यूमर और हेल्थकेयर सेक्टर में योगदान दे रही हैं।

एआइ प्रतिभाओं की अधिकता टियर-1 शहरों में :

भारत में पांच प्रमुख एआइ पेशेवरों मशीन लर्निंग इंजीनियर, डेटा इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, डेटा आर्किटेक्ट और डेवलपमेंट एंड ऑपरेशन इंजीनियर की मांग सबसे ज्यादा (७३त्न) है। देश के टियर-1 शहरों में 70 फीसदी डेटा साइंटिस्ट और एआइ प्रतिभाएं मौजूद हैं। इसके अलावा टियर-2 शहर भी तकनीकी प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इन शहरों में जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद और लखनऊ आदि शामिल हैं। हालांकि एआइ कौशल को बढ़ाने और बड़े पैमाने पर प्रस्तावों को लागू करने के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।