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पार्सल शिपिंग में भारत का जलवा, 18% की तेजी

2022 के दौरान ई-कॉमर्स के विस्तार के कारण भारत पार्सल वॉल्यूम में 18 फीसदी की सर्वाधिक वृद्धि के साथ अमरीका, ब्रिटेन, चीन, जापान, इटली, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, स्वीडन, नॉर्वे, फ्रांस और कनाडा सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आगे रहा। यह आंकड़ा 2021 की आठ फीसदी की तुलना में पर्याप्त वृद्धि को दर्शाता है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Aug 28, 2023

पार्सल शिपिंग में भारत का जलवा, 18% की तेजी

पार्सल शिपिंग में भारत का जलवा, 18% की तेजी

नई दिल्ली। दुनियाभर में भेजे गए पार्सल की संख्या रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 2022 में 161 अरब पैकेजेस भेजे गए, प्राप्त हुए या लौटा दिए गए। पार्सल मार्केट में सबसे बड़ा खिलाड़ी चीन है। पिछले साल चीन की वृद्धि दर धीमी रही फिर भी इसका पार्सल वॉल्यूम 11१ अरब के आंकड़े को पार कर गया। चीन के बाद अमरीका और जापान का स्थान है। ये तीनों मिलकर 87 फीसदी ग्लोबल पार्सल वॉल्यूम का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कर्बसाइड पिकअप हो रही लोकप्रिय:

पार्सल शिपिंग एक तेजी से बढ़ता हुआ व्यवसाय है। दुनियाभर में हर एक सेकंड में 5,102 पार्सल भेजे जाते हैं। 2022 में ग्लोबल पार्सल वॉल्यूम में केवल एक प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मुख्य रूप से चीन के लॉकडाउन से प्रभावित हुई। चीन की पार्सल मात्रा में मात्र महज दो प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जो इतिहास में अब तक की सबसे धीमी दर है। चीन भले ही शिपिंग वॉल्यूम के मामले में आगे हो लेकिन प्रति पार्सल शुल्क काफी ज्यादा होने की वजह से इनसे होने वाली आय अमरीका को इस रेस में आगे ले जाती है। दुनियाभर में अब कर्बसाइड पिकअप भी लोकप्रिय हो रहे हैं। कर्बसाइड पिकअप एक ऐसी सेवा है, जो ग्राहकों को आइटम को उनके पर घर भेजने के बजाय सुविधाजनक स्थान से ऑर्डर लेने की अनुमति देती है।

महंगाई की मार ब्रिटेन के पार्सल उद्योग पर:

सालाना अरबों पार्सल का आदान-प्रदान करने वाले देशों में फ्रांस, कनाडा, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, इटली और ब्रिटेन भी शामिल हैं। ब्रिटेन में पिछले साल पांच अरब पार्सल भेजे गए। यहां पार्सल वॉल्यूम में पांच फीसदी की कमी हुई है। एक दशक के दौरान ऐसा पहली बार हुआ है। लोगों ने ऑनलाइन खरीदारी की बजाय स्टोर जाना बेहतर समझा। इसका एक अन्य कारण यहां लगातार बढ़ती महंगाई को भी माना जा रहा है, जिसने लोगों की क्रय क्षमता पर असर डाला है। घटती आबादी वाले देश जापान के पार्सल वॉल्यूम में भी एक फीसदी से अधिक की कमी आई है। वहीं जर्मनी को भी कूरियर, पार्सल डिलीवरी के क्षेत्र में सात प्रतिशत की सालाना कमी का सामना करना पड़ा है।

भारत के पार्सल वॉल्यूम में दिखी रेकॉर्ड बढ़ोतरी:

भारत का पार्सल वॉल्यूम 2021 में 2.7 अरब था जो पिछले साल तेज गति से बढ़कर 3.2 अरब का हो गया। पिटनी बोवेस पार्सल शिपिंग इंडेक्स में इसके पीछे कोरोना माहामारी के दौरान लगे लॉकडाउन, देश में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स उद्योग और डिजिटल परिवर्तन को प्रमुख कारण माना गया है। ई-कॉमर्स की बढ़ती रफ्तार की वजह से भारत में प्रति दिन 88 लाख पार्सल का आदान-प्रदान होता है। इस तरह भारत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पार्सल शिपिंग, दोनों के लिए एक संपन्न बाजार के रूप में अपनी दावेदारी को साबित कर रहा है।